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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. भारत को आजादी की बात जब भी उठती है तो सबसे पहले जहन में एक ही नाम आता है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का। गांधी जी ने अपना आंदोलन के दौरान अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया। अहिंसा का रास्ता अपनाए गांधी जी ने सत्याग्रह, अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे आंदोलन कर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया। लेकिन 30 जनवरी 1948 में दिल्ली में सरेराह उन्हें गोलियों से भून दिया गया। उस दिन दिल्ली के बिरला हाउस में महात्मा गांधी एक प्रार्थना सभा में शिरकता करने पहुंचे थे। वहां से बाहर निकलते वक्त नाथूराम गोड़से ने उन्हें गोली मार दी थी। dainikbhaskar.com गांधी के पुण्यतिथि से एक दिन पहले ही आपको उनके जीवन से जुड़ा एक ऐसा सच बता रहा है जिसके निशान आज तक मौजूद हैं।
भारत के सभी आम नागरिक जानते हैं कि जब-जब गांधी जी लाठी लेकर निकले तो लोग उनके पीछे चले और कारवां बनता गया। लेकिन गांधी जी के जीवन से जुड़ी एक ऐसी बात है जिसके बारे शायद उनके करीबियों के अलावा बहुत कम लोग जानते हैं। गांधी जी हमेशा धोती पहने, लाठी लिए पैदल ही चलते थे। लेकिन उस जमाने में भी गांधी जी के पास एक 'रॉयल कार' थी। उनकी अपनी कार। जिसे भारत के राजा ने उन्हें तोहफे में दिया था। गांधी जी की हत्या के बाद महात्मा गांधी की कार एंग्लो-इंडियन सैनी कालिब द्वारा खरीद ली गयी। सैनी कालिब वाराणसी के एक उधोगपति था उसके बाद उसने इस कार को कुछ समय बाद निलाम कर दिया जिसे दिल्ली के परवेज जमाल सिद्दकी ने खरीद लिया। आज भी ये कार उनके पास है।
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नोटः 30 जनवरी को गांधी जी की पुण्यतिथि है। इस मौके पर हम आपको गांधी जी के जीवन से जुड़ी कुछ बातें बता रहे हैं। आज गांधी जी की सवारी(उनकी कार) की चर्चा की गई है।
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