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तीन गोलियां लगने के बाद भी अस्पताल नहीं ले जाए गए 'बापू', आखिर क्यों?

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। आज महात्मा गांधी की 66वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 के दिन दिल्ली में बिड़ला भवन में उनकी हत्या कर दी गई थी। महात्मा गांधी उस व्यक्तित्व का नाम था जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ी। चाहे वह स्वतंत्रता के लिए किए गए आंदोलन हों या फिर उनका दांडी मार्च। देश से लेकर विदेशों तक आज भी उसकी चर्चा होती ही है। देश की आजादी में अहम किरदार निभाने वाले बापू राष्ट्रपिता के तौर पर हमारे बीच आज भी मौजूद हैं। नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। हालांकि इस दिन बापू के शरीर ने तो दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन स्वतंत्रता के लिए किया गया उनका संघर्ष आज भी पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें याद कर रहे हैं। देश की आजादी के लिए लोगों को एकजुट होकर रहने का संदेश देने वाले 'बापू' खुद इस आजादी का आनंद नहीं उठा सके।
आजादी के महज 168 दिन बाद बेरहमी से दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन जाते-जाते भी वह दुनिया के आगे भारत को वो दे चुके थे, जिसकी कल्पना उनके बिना करना भी शायद बेमानी होगा। बेरहमी से हुई हत्या के बाद सड़क पर बीचों-बीच राष्ट्रपिता ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया था। इस दौरान वे अपने सहयोगियों से घिरे थे, लेकिन गोली लगने पर भी उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया गया। आखिर क्यों..??? इसका जवाब आज तक नहीं मिला। बताया जाता है कि उन्हें तीन गोलियां लगने के बाद भी अस्पताल की बजाए वापस बिड़ला हाउस में ही ले जाया गया था।
आगे की स्लाइड में पढ़िए पहले भी तीन बार नाथूराम ने की थी महात्मा गांधी को मारने की कोशिश...