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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. दिल्ली सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे अस्थायी गेस्ट शिक्षक और डीटीसी कर्मचारियों को दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने चेतावनी के स्वर में कहा कि टीचर और डीटीसी कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तो नौकरी से हटाया जाएगा।
उन्होंने शिक्षकों से हड़ताल वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि ठेके के सभी कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए आयोग का गठन किया जा चुका है और इस मामले पर सरकार का अंतिम फैसला होने तक किसी को हटाया नहीं जाएगा। उन्होंने कहा जनवरी-फरवरी बच्चों की पढ़ाई के लिए से साल का सबसे महत्वपूर्ण समय है, ऐसे में सभी शिक्षकों को अपने स्कूलों में होना चाहिए।
यदि वे अपने काम पर नहीं लौटेंगे तो सरकार को मजबूरन स्कूलों में नए शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से भर्ती करना होगा और भविष्य में जब ठेके के कर्मचारियों को स्थायी करने पर विचार होगा तो इन नए शिक्षकों पर भी विचार होगा जबकि जिन्हें काम पर न लौटने की वजह से हटाया जाएगा उनपर सरकार विचार नहीं करेगी। शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद शिक्षकों के तेवर और कड़े हो गए हैं, जबकि अनशन पर बैठे शिक्षक सुरेश कुमार मिश्रा की तबीयत बिगडऩे पर एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कर्मचारी अपने को स्थायी किए जाने की मांग को लेकर दो सप्ताह से हड़ताल पर बैठे हैं और शिक्षकों ने तीन दिन से भूखहड़ताल शुरू कर दी है।
शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि वह मर जाएंगे, लेकिन सरकार के अन्याय को नहीं सहेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन ने भी हड़ताली शिक्षकों को अपना समर्थन देते हुए कहा है कि शिक्षकों की मांग जायज है। डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा बुरी तरह प्रभावित हो गई है। लोगों को गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए बसें नहीं मिल रही हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि अनुबंध पर कार्यरत इन कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए 13 सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। कमेटी अपनी सिफारिशें एक माह में देगी। सिफारिशों के आधार पर ही इन कर्मचारियों को स्थायी
किया जाएगा।
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