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एमसीडी पुरानी कंपनी को ही देगी टोल टैक्स का ठेका

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. टोलटैक्स वसूली करने के मामले में पहले से ही विवादों में रही एमसीडी एक बार फिर से पुरानी कंपनी मैसर्स एसएमएस टोल वे प्राइवेट लिमिटेड को ही दिल्ली में आने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूल करने का ठेका देने की तैयारी कर रही है। टोल टैक्स वसूलने के ठेके में तीन माह का विस्तार करने के बारे में तीनों एमसीडी स्थाई समिति व सदन में प्रस्ताव लाने जा रही है।
इस बारे में निगम के एक अधिकारी का पहचान छुपाने के शर्त पर कहना है कि टैक्स वसूली के टेंडर में देरी कर कमिश्नर के स्तर के अधिकारियों द्वारा करोड़ों का फायदा पहुंचाया जा रहा है। कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए एमसीडी टोलटैक्स वसूलने का टेंडर छोटे-छोटे स्लॉट नहीं कर जानबूझकर बड़ा टेंडर कर रही है। जिस कारण कोई भी कंपनी इस टेंडर को लेने के लिए तैयार नहीं हो रही है और पिछले नौ माह से एमसीडी को टेंडर का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है।
इसका अपरोक्ष फायदा पहले से ही टोल टैक्स वसूल रही कंपनी को मिल रहा है। इससे पहले तीनों एमसीडी के मेयरों ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए स्थाई समिति व सदन में लाए बिना ही अपने स्तर पर मौजूदा कंपनी को 541 करोड़ रुपए की सालाना रकम पर नया टेंडर होने तक टेंडर के अनुबंध को बढ़ा दिया था, जिसकी अब अवधि समाप्त हो रही है। इसलिए एक बार फिर से एमसीडी टोल टैक्स वसूल करने का काम पुरानी कंपनी को ही नया टेंडर होने तक सौंपने जा रही है।
मामले की जांच हो: सूरी
साउथ एमसीडी के नेता प्रतिपक्ष फरहाद सूरी का कहना है कि श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च से एमसीडी ने टोल टैक्स से सालाना होने वाली कमाई के लिए लाखों रुपए के खर्च से सर्वे कराया था। श्रीराम ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में टोल टैक्स से सालाना 1574 करोड़ रुपए आय की बात कही थी। एमसीडी को इसी सर्वे के आधार पर टोल टैक्स का नया टेंडर करना था।
श्रीराम की रिपोर्ट के बाद एमसीडी ने टोल टैक्स की रिजर्व प्राइज 878 करोड़ रुपए रखी थी। पर चर्चा है कि टोल टैक्स कमेटी के अधिकारियों ने टेंडर की रिजर्व प्राइज को स्थानीय निकायों के निदेशक (डीएलबी) मीटिंग में 878 से 541 करोड़ सालाना कम कर दिया कि अधिक रिजर्व प्राइज होने के चलते टेंडर में ठेकेदार हिस्सा नहीं लेंगे।
टोल टैक्स का नया टेंडर 541 करोड़ रुपए सालाना रिजर्व प्राइज पर नया टेंडर होने तक मौजूदा कंपनी को सौंपने कमेटी ने सिफारिश कर दी। जिससे कंपनी को करोड़ों का फायदा हुआ इसकी जांच होनी चाहिए। हम टेंडर अवधि बढ़ाए जाने को लेकर प्रस्ताव का स्थायी समिति और सदन में अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।