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मोदी सरकार पर भड़कीं मेधा, कहा- फैसले से साबित होती है नई सरकार की मंशा

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बच्चों की किताब से उन पर समर्पित एक चैप्टर को हटाने के लिए मोदी सरकार की खिंचाई की है। नाराज मेधा ने कहा, "इससे साबित होता है कि मोदी सरकार किस मंशा से काम कर रही है। मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था। पहली बार शुक्रवार को मैंने अखबारों में यह खबर पढ़ी। इससे नई सरकार की कार्यनीति और मंशा साफ होती है कि वह किस तरह से अपने हित को साधने के लिए काम कर रही है। नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) की किताब में "बच्चे जिनसे ये महान बने' टाइटल वाले चैप्टर से मेधा का हिस्सा हटा दिया गया है।
इस किताब में 12 मशहूर शख्सियतों के कामों का उल्लेख है जिनसे इनकी पहचान बनी। इसमें इनके जीवन के संघर्षों और व्यक्तित्व की चर्चा है। इस किताब में विभिन्न नागरिक आंदोलनों से जुड़ीं मेधा पाटकर को भी जगह दी गई थी। अब इनके हिस्से को हटा दिया गया है।
एनबीटी ने यहां फैसला अहमदाबाद स्थित नेशनल काउंसिल फोर सिविल बर्टीज(एनसीसीएल) की आपत्ति के बाद लिया है।
एनसीसीएल ने कहा था कि मेधा के बारे में जो चैप्टर है उसे हटा देना चाहिए क्योंकि देश के लिए इनका योगदान संदिग्ध है। एनसीसीएल के प्रेजिडेंट वीके सक्सेना ने एचआरडी मंत्रालय को भी चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि कृषि विज्ञानी स्वामीनाथन और रस्किन बॉन्ड जैसे लेखकों के साथ मेधा को इस किताब में रखना एक अनचाही बड़ी भूल है जबकि एनबीटी का कहना है कि इस मामले में किताब के मैटर की जांच के बाद मेधा के हिस्से को हटाने का फैसला लिया गया। पूरे विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया कि मेधा अब सामाजिक कार्यकर्ता से किसी खास पार्टी की नेता बन चुकी हैं। वह अब चुनाव भी लड़ रही हैं। ऐसे में इस किताब के मेधा वाला चैप्टर हटाना पड़ा। एनबीटी ने यह भी कहा कि अब इस संस्करण को फिर से रिवाइज किया जाएगा।