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दलालों ने फैलाया ऐसा मकड़जाल कि बेटे की तलाश में ठोकरें खा रहा है पिता!

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.नारायण सिंह ने काफी मशक्कत से पैसे जोड़कर बेटे को मर्चेंट नेवी की पढ़ाई कराई। फिर बेटे को मलेशिया में अच्छी नौकरी दिलाने के लिए दलालों को छह लाख रुपए भी दिए। लेकिन वह दलालों के मकड़जाल में इस कदर फंसे कि 10 माह बीत गए लेकिन आज तक बेटे की कोई खबर नहीं है।
दलालों ने बेटे के मलेशिया में मरने की बात कही और एक शव को हिन्दुस्तान भेजा, लेकिन वह शव बेटे का नहीं था। आज नारायण सिंह को यह भी नहीं मालूम है कि उनका बेटा जिंदा भी है या नहीं। उधर, नौ माह के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली पुलिस ने केवल धोखाधड़ी व कागजात से छेड़छाड़ का मुकदमा ही दर्ज किया है। खुद पुलिस भी लापता लड़के को खोजने की जहमत उठाने को तैयार नहीं है।
मूल रूप से उत्तराखंड के पौढ़ी गढवाल निवासी नारायण सिंह ने बताया कि उनके बेटे कुंदन सिंह ने मर्चेंट नेवी की पढ़ाई करने के बाद द्वारका के मार्कस एविएशन एंड मेरीन अकेडमी में छह माह की ट्रेनिंग ली थी। छह लाख रुपए लेने के बाद कंपनी के मालिक मनु वालिया ने मलेशिया में बतौर सुपरवाइजर नौकरी दिलाने का वादा किया। बीते वर्ष जून माह में मलेशिया पहुंचते ही पुत्र ने उन्हें फोन पर बताया कि यहां सब कुछ ठीक नहीं है। उसे तीन साल के वर्किग वीजा की जगह केवल एक माह के टूरिस्ट वीजा पर विदेश लाया गया है।
साथ ही उससे सुपरवाइजरी नहीं बल्कि मजदूरी कराई जा रही है। पीड़ित पिता ने बताया कि जब उन्होंने मनु वालिया को इस बात की शिकायत की तो उसने उन्हें डरा धमका कर चुप करा दिया। दरखास्त के बाद एक अगस्त को उसे मलेशिया में ही दूसरे शिप पर काम दे दिया गया। लेकिन तीन दिन बाद ही मनु वालिया ने उन्हें फोन कर बताया कि उनका बेटा संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। छह अगस्त को उन्हें बेटे के मृत अवस्था में पानी में मिलने की सूचना दी गई।
जब सील बंद शव उत्तराखंड आया तो मजिस्ट्रेट व अन्य जन प्रतिनिधि के सामने पता चला कि शव उनके बेटे का है ही नहीं। उन्होंने बीते साल 18 अगस्त को मनु वालिया और मलेशिया में उसके साथी रितेश और विनोद के खिलाफ शिकायत दी। पहले दो देशों के बीच सीमा और फिर दो राज्यों के बीच फंसे इस मामले में करीब नौ माह बीतने के बाद डाबड़ी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। उन्होंने अब बेटे के जिन्दा वापस आने की आस तक छोड़ दी है।