नई दिल्ली. रक्षा सौदों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार बिचौलियों को कानूनी दर्जा देने की दिशा में काम कर रही है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने शुक्रवार को बताया कि इस संबंध में जनवरी तक स्पष्ट नीति आ जाएगी। एक कार्यक्रम में प्रश्नों का जवाब देते हुए पर्रीकर ने कहा, "ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिन्होंने रक्षा सौदों में दलाल बनकर बड़ी-बड़ी कोठी बना ली। दलाली नहीं होनी चाहिए।
साफ तौर पर पारदर्शी तरीके से भुगतान होना चाहिए। ढेरों मामले रुके हुए हैं। मेरे पास 2007 तक के मामले आ रहे हैं। ताज्जुब होता है कि फैसलों में इतनी देरी हो रही है। जितनी देरी होती है, उतना दलाली का मौका मिल जाता है।' उन्होंने यह भी कहा, कोई एग्रीमेन्ट का उल्लंघन करे तो उस पर भारी दंड होना चाहिए। ताकि वह गलत करने से पहले सौ बार सोचे। अगर आपने उल्लंघन किया है, तो चार-पांच गुना पेनल्टी लगा दो। इसके ऊपर भी सुझाव लेंगे।'
पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने की जरूरत
रक्षामंत्री ने यह भी कहा- पाक की हरकतों पर ईंट का जवाब पत्थर से देने की जरूरत है। हम कह सकते हैं गन का मुंह उधर घुमा दो। हमारी रणनीति में ये कॉन्सेप्ट रहेगा। लेकिन यही सॉल्यूशन नहीं है।
गंदगी भी साफ करनी पड़ती है
पर्रीकर ने सेना में भ्रष्टाचार के सवाल पर कहा, "केवल ईमानदार रहना हल नहीं है। करप्शन केवल पैसे का ही नहीं, बल्कि मन का भी होता है। गंदगी में जाकर गंदगी साफ करनी पड़ती है। मैं काजल की कोठरी में जाने से नहीं डरता। मैं बाहर आ जाऊंगा। आलोचक कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन मैं अपने फैसले लेने से नहीं डरता।'