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अमेरिका में बसे भारतीयों ने मोदी सरकार से मांगे पासपोर्ट

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. अमेरिका में बिना किसी वैध कागजात के रह रहे करीब साढ़े चार लाख भारतीयों ने मोदी सरकार से अपने लिए पासपोर्ट सहित वैध दस्तावेज जारी करने की गुहार की है। उन्होंने मोदी-ओबामा के बीच दोस्ती के नए आयाम का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे हैं। अमेरिका के न्यू जर्सी में रहने वाले ऐसे ही एक भारतीय रवि पटेल ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में यह जानकारी दी।
पटेल बिना कागजात के रह रहे लोगों के समूह के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा, अभी तक कोई समस्या नहीं थी कि क्योंकि स्थानीय परिचय पत्र के आधार पर ही बैंक अकाउंट से लेकर विवाह पंजीकरण तक की सुविधा मिल जाती थी। लेकिन कुछ समय पहले ही ओबामा सरकार ने डीएपीए-डीएसीए (इमीग्रेशन एक्जीक्यूटिव एक्शन) नीति की घोषणा की है। इसके तहत मई 2015 से पहले अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करनी है। उन्होंने कहा, हमारा अनुरोध है कि भारत सरकार इस मामले में हमारी मदद करे।पत्र में इन भारतीयों ने कहा है भारत और अमेरिका के बीच जब रिश्ते नए सोपान में जा रहे हैं तब भारत सरकार को मदद करनी चाहिए।
विदेश मंत्रालय 7-9 फरवरी तक हैड ऑफ मिशन सम्मेलन कर रहा है, उसमें भी यह मुद्दा उठाना चाहिए। इसी मौके पर मदद वाला कदम उठाना चाहिए। इनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच मैत्रीपूर्ण बातचीत के मद्देनजर भी मोदी सरकार को अमेरिका में रहने वाले भारतीय नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए। पटेल ने कहा, ‘मैक्सिको, आयरलैंड, फिलीपींस सहित कई देश अपने ऐसे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। हम अपने परिजनों को डॉलर भेज कर भारत की अर्थव्यवस्था में भी मदद करते हैं।
हमने यहां एक संगठन ‘इंडियन फॉर आइडेंटिफिकेशन’ भी बनाया है।’ इधर, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया सरकार स्तर पर इस समस्या पर चर्चा हो रही है। हालांकि मदद कैसे होगी, यह फिलहाल कहना उचित नहीं होगा।
पुरानी मानसिकता छोड़ें भारतीय राजनयिक: मोदी
नेशनल ब्यूरो, नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनयिकों से शनिवार को कहा वे ‘पुरानी मानसिकता’ छोड़ें और देश को विश्व में एक संतुलन की शक्ति बनाने की बजाए उसे नेतृत्वकारी भूमिका में लाने की दिशा में काम करें। उन्होंने यहां भारत के लगभग 120 राजनयिक मिशनों के शीर्ष राजनयिकों के चार दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज वैश्विक शांति और खुशहाली को लेकर नए ‘खिलाड़ियों’ के साथ ही नए ‘खतरे’ भी हैं और इन चुनौतियों का मुकाबला करने में विश्व की मदद करने के लिए भारत की बड़ी जिम्मेदारी है।
मोदी ने कहा, ‘मौजूदा वैश्विक वातावरण एक दुर्लभ अवसर प्रदान कर रहा है, जब विश्व भारत को गले लगाने के लिए उत्सुक है, और भारत विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।’ उन्होंने राजनयिकों से कहा कि इस अनूठे अवसर का उपयोग वे भारत की नेतृत्वकारी स्थिति बनाने के लिए करें, न कि विश्व की केवल संतुलनकारी शक्ति बने रहने में।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मोदी ने राजनयिकों से कहा कि वे ‘पुरानी मानसिकता’ का त्याग करें और बदलती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तेजी से अपने को ढालें। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने उन अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने विदेशों में देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। इस चार दिवसीय सम्मेलन के अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने राजनयिकों को उन्होंने ‘तेजस्वी, जीवंत और अनुपम’ बताते हुए कहा कि वे भारत की महान विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
संबंधों पर विशेष जोर : मोदी ने भारत के राजनयिक मिशनों से ‘स्वच्छता की संस्कृति’ को आगे बढ़ाने में सहयोग करने तथा ‘डिजिटल डिप्लोमेसी’ में आगे बने रहने के प्रयास करने को कहा। भारत की सर्वोत्तम संस्कृति को विश्व में दर्शाने के लिए डिजिटल लाइब्रेरियां स्थापित करने को कहा। मोदी ने राजनयिकों से विश्व के उन विशिष्ट लोगों से सतत संपर्क में रहने को कहा जो भारत की यात्रा करना चाहते हैं या कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘पूरे मानव इतिहास में संबंधों का विशेष महत्व रहा है।’