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दिल्ली की माॅर्निंग वॉक दमा रोगियों के लिए खतरनाक, सीएसई का खुलासा

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. यदि आप माॅर्निंग वाॅक का शौक रखते हैं तो थोड़ा सावधान हो जाइए। सर्दियों में दिल्ली की सुबह कुछ ज्यादा ही प्रदूषित हो जाती है। इसकी वजह से सांस और अस्थमा रोगियों की मुसीबत कई गुना बढ़ जाती है। सेंटर फॉर साइंस की ताजा सर्वे में इसका खुलासा करते हुए कहा गया है कि दिल्ली में रात के समय आने वाले मालवाहक वाहनों (ट्रक) से प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी हो रही है। सेंटर फॉर साइंस ने अपने इस सर्वे में दिल्ली के सबसे अधिक हाईप्रोफाइल लुटियंस जोन को भी शामिल किया है और दावा किया है कि लुटियंस जोन में भी वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रात्रि में मालवाहक ट्रकों की दिल्ली में प्रवेश के अलावा सर्दी के मौसम में शांत और कुहरा की वजह से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है, जबकि गर्मियों के मौसम में गर्म हवा की वजह से वायु प्रदूषण का स्तर कम रहता है। नवंबर महीने में किए गए इस सर्वेक्षण में दिल्ली के संभ्रांत लोगों को भी शामिल किया गया है और उनके माॅर्निंग वाॅक स्थल पर वायु प्रदूषण के स्तर का रिकाॅर्ड तैयार किया है।
ग्रीन और स्वच्छ लुटियंस जोन में भी वायु प्रदूषण
लोधी स्टेट में 12-13 नवंबर को सुबह साढ़े छह बजे वायु प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक 1195.83 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया। इसी तरह 8-9 दिसंबर को सुबह 5 से 6 बजे के बीच वायु प्रदूषण का स्तर 672 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से 762 माइक्रोग्राम प्रतिक्यूबिक मीटर पाया गया, जो कि निर्धारित मानक से दो गुना ज्यादा था। सर्वे में कहा गया है कि वायु प्रदूषण का सर्वाधिक भुक्तभोगी पैदल चलने अथवा साइकिल सवार लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ज्ञात हो कि 23 नवंबर को इंडिया गेट जैसे खुले और हरे-भरे स्थान पर भी सुबह में 7-8 बजे के बीच वायु प्रदूषण 815 माइक्रोग्रमा प्रति क्यूबिक मीटर था। गौरतलब है कि 23 नवंबर, रविवार को दिल्ली मैराथन का आयोजन किया गया था। यह स्तर सामान्य से 2.4 गुना ज्यादा था। सीएसई की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता राय चौधरी का कहना है कि नवंबर महीने में 53 फीसदी दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा था।
सख्ती बरतने की जरूरत
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त एक्शन की जरूरत है। इसके तहत एयर क्वालिटी इंडेक्स को स्वास्थ्य एडवाइजरी और पॉल्यूशन इमरजेंसी मानक के साथ लागू किया जाए। वाहनों में अच्छी गुणवत्ता के डीजल का उपयोग किया जाए। डीजल के अपेक्षा सीएनजी को बढ़ावा देने की जरूरत है। पुराने वाहनों के प्रति सख्त कार्रवाई की जाए। वाहनों की जांच के लिए आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जाए। मौके पर ही वाहन का प्रदूषण स्तर जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उन्हें रोड से तत्काल हटाया जाए। प्रदूषण के स्तर पर वाहनों को यूरो-1, यूरो-2, यूरो-2 विंटेज की श्रेणी में रखा जाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देते हुए इसी साल 11 हजार बसों को लाया जाए। वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाए। सड़कों के किनारे फुटपाथ से अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि पैदल यात्रियों को दिक्कत न हो। फ्री पार्किंग को समाप्त किया जाए। पार्किंग शुल्क में वृद्धि की जाए।