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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. वेतन आयोग की सिफारिशों, डीओपीटी के नियमों के अनुसार उन्हीं शिक्षकों को एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन स्कीम (एसीपी) मॉडीफाइड एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन स्कीम (एमएसीपी) स्कीम का लाभ दिया जाता है जो योग्य हो और टीजीटी, एचएम पदों पर प्रमोशन ले। जबकि एमसीडी ने नियमों को तोड़ते हुए उन शिक्षकों को भी एसीपी व एमएसीपी का लाभ दे दिया जो योग्यता के बावजूद इसलिए प्रमोशन नहीं ले रहे थे, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें एमसीडी छोड़कर जाना पड़ता और अतिरिक्त कार्य करना पड़ता।
शिक्षकों को बैक डेट से एमएसीपी स्कीम देने के लिए एमसीडी को सालाना 8 से 10 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इस मामले पर विभागीय मोहर लगाने के लिए विभाग महापौर मास्टर आजाद सिंह से एक एप्रूवल भी ले लिया है जिसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। सबसे हैरत की बात यह है कि 6600 पे ग्रेड का लाभ केवल नार्थ एमसीडी के टीचर व हेडमास्टर उठा रहे हैं। साउथ व ईस्ट एमसीडी के फाइनेंस विभाग ने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए इस प्र ग्रेड पे अपने टीचरों व हेडमास्टरों को देने से इनकार कर दिया था।
क्या था यह मामला
ज्ञात हो कि पांचवे वेतन आयोग के पूर्व के शिक्षकोंं को 12 व 24 वर्ष की सेवा पर क्रमश: वरिष्ठ व चयन वेतन मान के रूप में 1400-2600 तथा 1640-2900 रुपए का वेतनमान एमसीडी व दिल्ली सरकार में कार्यरत दोनों की शिक्षकों को मिलता था। पंचम वेतन आयोग डीओपीटी के गाइड लाइन अगस्त 99 के अनुसार केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए एसीपी स्कीम लागू की गई। लेकिन यह शिक्षकों के लिए नहीं थी क्योंकि शिक्षकों के लिए पहले से ही वरिष्ठ चयनमान स्कीम थी। फिर भी दिल्ली सरकार ने दिनांक 25 अगस्त 2003 को एसीपी स्कीम शिक्षकों पर अधिसूचना जारी कर पिछली स्कीम के स्थान पर लागू की, जिसे 9 अगस्त 99 से लागू कर प्राथमिक शिक्षकों को 12 व 24 वर्षों की सेवा के पश्चात क्रमश: 5500-9000 व 6500-10500 का वेतनमान दिया। दिनांक 3 जून 2006 को निगम प्रस्ताव संख्या 102 के तहत सदन से स्वीकृति लेकर 9 अगस्त 99 से लागू कर दिया।
छठवें वेतन आयोग में निगम द्वारा केन्द्र और दिल्ली सरकार के नियमों व परिपत्रों के अनुसार एसीपी के स्थान पर एक सितंबर 2008 से तीन स्तरीय एमएसीपी स्कीम लागू कर दी गई। इसमें नियम यह था कि पदोन्नत योग्य होने पर पदोन्नति स्वीकार न करने वाले शिक्षक एसीपी व एमएसीपी स्कीम का लाभ नहीं ले सकेंगे। लेकिन बताया जा रहा है कि एमसीडी शिक्षकों को दो ढाई घंटे पढ़ाकर जान छूट जाती है, लेकिन दिल्ली सरकार गए तो उन्हें छात्रों को पढ़ाना तो पड़ेगा ही, रिजल्ट की भी जिम्मेदारी होगी। इसलिए शिक्षक प्रमोशन लेकर दिल्ली सरकार में नहीं जाना चाहते।
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