नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने अपनी पत्नी से बलात्कार और उसे अप्राकृतिक सेक्स में शामिल होने के लिए मजबूर करने के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत याचिका को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि महिलाओं को वैवाहिक बलात्कार तथा उनके पतियों की हर प्रकार की ‘यौन विकृतियों’ से कानूनी संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है। दिल्ली निवासी पीड़ित महिला ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि उसका पति उसके साथ बलात्कार और अप्राकृतिक सेक्स करता था। उसने कहा कि वह उसे अश्लील वीडियो दिखाता था और उसे अपने दांतों से काटकर शारीरिक रूप से भी आहत करता था। आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि वह उसका पति है, इससे उसका अपराध कम नहीं हो जाता।
अदालत ने कहा, ‘महिलाओं को सभी प्रकार की यौन विकृतियों से संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए और सिर्फ इसलिए कि शिकायतकर्ता आरोपी की पत्नी है, उससे अपराध किसी भी तरह से कम नहीं हो जाता।’
न्यायाधीश ने कहा, ‘जिन गतिविधियों की शिकायत की गई है महिला द्वारा, वे न केवल प्रकृति की व्यवस्था के खिलाफ अप्राकृतिक अपराध हैं बल्कि आरोपी की कथित गतिविधियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार की संशोधित परिभाषा के भीतर लाती हैं जिन्हें केवल रिश्ते की बिना पर नहीं देखा जा सकता कि शिकायतकर्ता आरोपी की पत्नी है। भारतीय कानून लंबे समय से की जा रही मांग के बावजूद वैवाहिक बलात्कार को स्वीकार नहीं करता।’