गाजियाबाद/नोएडा. वर्ष 2006 में हुए बहुचर्चित निठारी कांड मामले में गिरफ्तार किए गए मोहिंदर सिंह पंढेर शनिवार को डासना जेल से रिहा हो गया। उसकी जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 सितम्बर को मंजूर की थी। रिहाई आदेश में कुछ खामी होने की वजह से दोबारा कोर्ट से रिहाई आदेश शनिवार को आया। उसके बाद शाम को उसे जेल से रिहा कर दिया गया। इसी मामले में गिरफ्तार सुरेंद्र कोली को सीबीआई की विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। कोली को फांसी देने की सारी तैयारी हो गई थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने उसकी फांसी पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। डासना जेल के अधीक्षक एसपी यादव ने बताया कि पंढेर को जेल से रिहा होने के बाद उसका बेटा करन उसे लेने आया।
मालूम हो कि नोएडा में हुए निठारी नरकंकाल मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। नोएडा पुलिस ने इस मामले में डी पांच सेक्टर 31 कोठी के मालिक मोहिंदर सिंह पंढेर व उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया। बाद में नोएडा पुलिस पर आरोपियों से मिली भगत का आरोप लगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की। जांच कर रही सीबीआई ने पंढेर को दोषमुक्त करार दिया।
लेकिन निठारी पीड़ितों ने सीबीआई कोर्ट में अपील कर नोएडा पुलिस की जांच पर सुनवाई करने की अपील की। कोर्ट ने नोएडा पुलिस की जांच पर सुनवाई करते हुए पंढेर व कोली दोनों को फांसी की सजा सुनाई। बाद में पंढेर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की और वहां से वह बरी हो गया। इस मामले में वह करीब आठ साल जेल में रहा। पंढेर की नोएडा सहित देश के विभिन्न जगहों पर जेसीबी मशीन का सर्विस सेंटर हैं।
क्या था मामला
नोएडा के निठारी कांड में करीब दो दर्जन बच्चे, बच्चियों व महिलाओं को अगवा कर उनकी हत्या कर उनके साथ दुष्कर्म करने के बाद शव को टुकड़े टुकड़े कर धड़ को खूनी कोठी के पास से बह रही नाली में फेंक दिया गया था और सिर को कोठी के पीछे बने यार्ड में फेंका जाता था। इस घटना का खुलासा नोएडा पुलिस ने 29 दिसंबर वर्ष 2006 को किया था। खूनी कोठी के पास से पुलिस ने दो दर्जन के करीब नरकंकाल बरामद किए थे।
इस मामले में 17 मुकदमे दर्ज हुए थे। सात मामले में अबतक सजाएं हो चुकी हैं। अन्य मामलों की सुनवाई चल रही है।