नई दिल्ली. नर्सरी दाखिले में इस बार डिस्टेंस के प्वाइंट को लेकर स्कूल और शिक्षा निदेशालय के बीच पेंच फंस गया है। स्कूल प्रबंधन जहां डिस्टेंस प्वाइंट को गांगुली कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप लागू करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं शिक्षा निदेशालय द्वारा यह कहकर उसे टाला जा रहा है कि यह कॉमन प्वाइंट सिस्टम के खांचे में गांगुली कमेटी का प्वाइंट सिस्टम ढांचा फिट नहीं बैठता और अधिकांश डीडीए लैंड पर बने पब्लिक स्कूल आबादी के क्षेत्र से दूर हैं।
हाल में वर्ष 2015 की नर्सरी दाखिला प्रक्रिया को लेकर कुछ पब्लिक स्कूलों के साथ शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने बैठक की जिसमें नर्सरी दाखिला प्वाइंट सिस्टम पर चर्चा की गई। जिसमें अभी अभिभावकों को जिस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, वैसा 2015 की नर्सरी दाखिला प्रक्रिया में न करना पड़े।
शिक्षा निदेशालय के सूत्र बताते हैं कि इस बार जो 70 अंक घर से स्कूल की दूरी के लेकर रखे गए हैं, उसे लेकर अधिकांश स्कूल प्रबंधकों की आपत्ति थी। उनका कहना था कि घर से स्कूल की दूरी जितनी नजदीक होगी, छोटे बच्चों को उतनी सहूलियत रहती है और इस आधार पर गांगुली कमेटी ने स्कूल की घर से दूरी बढ़ने के साथ-साथ प्वाइंट वैटेज को घटाने का फार्मूला दिया था।
इसके अलावा पब्लिक स्कूलों की ओर से मैनेजमेंट कोटा फिर से बहाल करने की सिफारिश की गई। क्योंकि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर राजनीतिक लोगों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को कुछ दाखिले करने पड़ते हैं, जो इसी कोटे के तहत संभव हैं। सिफारिश के आधार पर दाखिले के लिए 20 फीसदी मैनेजमेंट कोटा फिर से लागू करने की मांग भी बैठक में उठी। अब अगली बैठक अक्टूबर माह में बुलाई गई है।
फिर से होगी परेशानी
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन कहते हैं कि वर्ष 2014-15 में नर्सरी दाखिला प्रक्रिया के लिए जो कॉमन प्वाइंट सिस्टम लागू किया, वह बंद कमरे में बैठकर तैयार किया गया फार्मूला था। ऐसा इस बार भी हो रहा है। न लोगों से लिखित में कोई फीडबैक ली जा रही, न ही पब्लिक स्कूलों से जुड़ी संस्थाओं से बात की जा रही।
गांगुली कमेटी ने काफी रिसर्च और लोगों की फीडबैक लेकर यह फार्मूला तैयार किया था। अगर आगामी वर्ष के नर्सरी दाखिले में प्वाइंट सिस्टम रखना है तो उसके लिए गांगुली कमेटी की सिफारिशों को ही लागू करना होगा और प्वाइंट सिस्टम निर्धारित करने का जिम्मा स्कूलों पर छोड़ना होगा। कोई स्कूल अगर मनमानी करे तो जिला स्तर पर बैठे अधिकारी उसकी जांच करें।