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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. नर्सरी दाखिले में पारदर्शिता अपनाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह दाखिले के लिए ड्रॉ तभी निकालेंगे जब सीटों से अधिक संख्या में आवेदन आ जाएं। साथ ही यह भी हिदायत दी है कि ड्रॉ इलेक्ट्रॉनिक या सॉफ्टवेयर बेस नहीं निकाला जाएगा। ड्रॉ मेन्युअली निकाला जाएगा। खास बात यह है कि ड्रॉ के वक्त दाखिला आवेदन करने वाले अभिभावक भी वहां मौजूद होंगे और स्कूल ड्रॉ की वीडियो रिकॉर्डिंग कराएंगे। अभिभावकों को भी मोबाइल व कैमरा ले जाने की इजाजत होगी, जो ड्रॉ की वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकें। अगर किसी अभिभावक की शिकायत आती है तो इस रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर लिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को यह भी निर्देश जारी किए हैं कि वह जुड़वां बच्चों को सिबलिंग की वैटेज दें।
अब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को देनी होगी आठ घंटे की ड्यूटी: दिल्ली की अतिरिक्त शिक्षा निदेशक मधु रानी ने निर्देश जारी करते हुए स्कूलों के टाइम में फेरबदल करते हुए कहा है कि स्कूलों में अध्यापकों को आठ घंटे की ड्यूटी करना अनिवार्य है। साथ ही शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षक को सप्ताह में 45 घंटे कार्य करना अनिवार्य है। जिन स्कूलों में सिंगल शिफ्ट चल रही है वहां सर्दियों में सुबह 7.15 से दोपहर 2.45 बजे तक शिक्षक की ड्यूटी अनिवार्य है। जबकि दूसरी पाली के स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी समय अब दोपहर एक बजे की बजाए सुबह 10.45 से शाम 6.15 किया गया है। गर्मियों में स्ूकू ल लगने का समय सुबह आधे घंटे पहले होगा और छूटने का समय भी आधा घंटे पहले होगा।
45 घंटे कार्य पर उपराज्यपाल को लिखा पत्र
शिक्षकों ने स्कूलों में समय परिवर्तन को लेकर उपराज्यपाल से आदेश वापस लेने की मांग की है। शिक्षकों ने कहा है कि आरटीई नियमों के अनुरूप स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं और न ही 35 छात्रों की कक्षा है। एक-एक कक्षा में 90 से 92 छात्र बैठते हैं। स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद सालों से रिक्त हैं। बैठने के लिए डेस्क नहीं हैं। पुराने और जर्जर भवनों में स्कूल चल रहे हैं, पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं है। ढांचागत सुविधाओं पर ध्यान देने की बजाए शिक्षा निदेशालय ने काम के घंटे सप्ताह में 36 से बढ़ाकर 45 कर दिए हैं। जिसमें शिक्षा के अधिकार कानून का हवाला दिया गया है। क्या ऐसा करने मात्र से यह कानून लागू हो जाएगा? इस बारे में शिक्षक नेता संत्रा वत्स ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर इस आदेश को तुरंत वापस लिए जाने की मांग की है।
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