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प्रशासन से आंदोलन तक नए-नए प्रयोगों वाली सरकार

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने सोमवार को एक महीने पूरे कर लिए और पहली बार सत्ता में आई आम आदमी पार्टी सरकार का यह महीना प्रशासन से लेकर आंदोलन तक नए-नए प्रयोगों में बीता। कई प्रयोगों व फैसलों में सरकार आगे बढ़ी तो कई फैसलों पर सरकार ने यू-टर्न लिया। सरकार ने 30 दिनों में ही कई उतार-चढ़ाव देखे। कई मुद्दों पर सरकार को वाहवाही मिली तो कई पर सरकार की किरकिरी हुई।

शपथ ग्रहण करते ही सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म करते हुए लाल बत्ती की गाड़ी, सुरक्षा व बड़ा बंगला न लेने का फैसला लिया। लेकिन बाद में केजरीवाल को छोड़कर बाकी मंत्रियों ने सरकार की बड़ी इनोवा गाडिय़ों का इस्तेमाल शुरू कर दिया और कुछ मंत्रियों ने फ्लैट भी ले लिए और भारी विरोध होने पर अरविंद ने 10 कमरों का फ्लैट वापस लौटा दिया। अब उनके लिए तीन कमरों का नया फ्लैट ढूंढा गया है, हालांकि केजरीवाल एक महीने बाद भी कौशांबी स्थित अपने आवास से ही अपनी बैगनआर कार में आते-जाते हैं।


700 लीटर पानी के वायदे पर सरकार ने हर दिन 667 लीटर मुफ्त पानी देने का फैसला लिया। सरकार ने जल बोर्ड में बड़ी कार्रवाई करते हुए 800 कर्मचारियों की अदला-बदली की। सीबीआई की जांच में पकड़े गए 14 और एक स्टिंग ऑपरेशन में घूस लेते जल बोर्ड के तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। टैंकर की जानकारियों को ऑनलाइन किया गया।


अपने घोषणा पत्र के वायदे के मुताबिक सरकार ने बिजली बिलों में 50 फीसदी की कटौती का एलान किया। साथ ही, शर्त जोड़ दी कि 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को ही इसका लाभ मिलेगा। बिजली मीटरों के जांच के आदेश दिए और वितरण कंपनियों के खातों की कैग से कराने का फैसला भी लिया। अपने शपथ ग्रहण भाषण के एलान के मुताबिक सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन शुरू की। इसी तरह नर्सरी दाखिले में अभिभावकों की शिकायत सुनने के लिए भी एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया गया। रिटेल में एफडीआई की अनुमति के पिछली सरकार के फैसले को पलट दिया गया। दिल्ली पुलिस के शहीद कांस्टेबल के परिजन को मुआवजे के तौर पर एक करोड़ की राशि दी गई जोकि सरकार की ओर से दी जाने वाली अबतक की अधिकतम राशि से बीस गुना ज्यादा है।

केजरीवाल का जनता दरबार बेकाबू भीड़ की भेंट चढ़ गया। केजरीवाल ने खुद माना कि यह प्रयोग इसलिए सफल नहीं रहा क्योंकि उम्मीद से 20 गुना ज्यादा भीड़ आ गई। इसके बाद उन्होंने हफ्ते में तीन घंटे जनता से मिलने और ई-मेल, कॉल सेंटर के जरिए शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था का एलान किया लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा हो गए इस बारे में कोई साफ तस्वीर सामने नहीं आ सकी है। हालांकि सचिवालय में शिकायत प्रकोष्ठ बना दिया गया है।


सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती पहले जजों की बैठक बुलाने की बात कहकर विवाद में आए तो बाद में खिड़की एक्सटेंशन में उनकी छापेमारी ने भारी बखेड़ा खड़ा किया। महिला आयोग के समन के बावजूद वे पेश नहीं हुए। भारती को हटाने के लिए लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहा है लेकिन सरकार को उनके बर्ताव में कुछ भी बुरा नहीं लगा। इसी तरह महिला कल्याण मंत्री राखी बिड़लान पहले एक बच्चे की गेंद से अपनी गाड़ी के कांच टूटने पर बवाल किया हालांकि उन्होंने बाद में अपनी शिकायत वापस ले ली। प्रशासन से इतर केजरीवाल ने पुलिस से विवाद होने पर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना देकर नया प्रयोग किया।

पांच पुलिसवालों के निलंबन न सही ट्रांसफर की मांग पर रेलभवन के पास रातभर खुले आसमान के नीचे बिताने वाले केजरीवाल महज दो पुलिसकर्मियों के छुट्टी पर भेजे जाने पर मान गए। विनोद कुमार बिन्नी के खुले विरोध ने सरकार के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए हालांकि आप पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामलों में मंत्री व अधिकारियों पर कार्रवाई करने, जनलोकपाल कानून, स्वराज कानून, ठेके के कर्मचारियों को स्थायी करने के वायदों को सरकार अमल में नहीं ला सकी लेकिन सरकार ने बीच-बीच में इस बारे में संकेत दिए कि इन मुद्दों पर सरकार आगे बढ़ रही है, आने वाले दिनों में उसके नतीजे सामने होंगे।