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जब गोलियों और धमाकों से गूंज उठी संसद, 30 मिनट मे पांच आतंकी हुए थे ढेर

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. सन् 2001 में हुए संसद हमले को 13 साल पूरे हो गए। इस हमले में कई लोग मारे गए थे। भारत के इतिहास में इस दिन को एक काले दिन के रूप में माना जाता है। ये हमला कुल 30 मिनट तक चला था। इस हमले में कुल 5 आतंकी भी मारे गए थे।
13 दिसंबर 2001 का दिन संसद में किसी और दिन की तरह ही था। संसद चल रही थी और ताबूत घोटाले का मामला गर्माया हुआ था। मामले पर इतना हो-हल्ला हुआ कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। तभी कुछ ऐसा हुआ जिसे भुलाना हर किसी के लिए मुश्किल है। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सभी सांसद बाहर आ गए। इनमें से कुछ बाहर बाते कर रहे थे तो कुछ हॉल में चर्चा कर रहे थे। सब इस बात से बेखबर थे कि संसद मार्ग पर कुछ हलचल चल रही है।
संसद की सुरक्षा में तैनात सिक्युरिटी ऑफिसर्स ने देखा कि एक सफेद रंग की एंबेसडर कार बड़ी तेजी से उनकी तरफ बढ़ रही है। ये गाड़ी संसद के 11 नंबर गेट की तरफ बढ़ती चली आ रही थी। कुछ ही देर में ये कार गेट नंबर 11 को पार कर 12 के पास पहुंचने लगी। यहीं से राज्यसभा के अंदर जाने का रस्ता शुरू होता है। संसद के आसपास कारों की आवाजाही आम है लेकिन ये कार धीरे-धीरे वाइस प्रेसिडेंट कृष्णकांत के काफिले की ओर बढ़ने लगी। काफिले के कारण इस एंबेसडर कार को रुकने के लिए इशारा किया गया। मगर कार की स्पीड कम नहीं हुई और वो तेजी से आगे बढ़ती गई। गेट पर तैनात एएसआई गाड़ी के पीछे भागे तो गाड़ी के ड्राइवर ने हड़बड़ा कर गाड़ी रोक दी।
सेना के कपड़ों में थे आतंकी
जीतराम ड्राइवर के पास पहुंचे और कार चालक की कॉलर पकड़ ली। अंदर सेना के कपड़ों में कुछ लोग बैठे हुए थे। इतना ही हुआ था कि ड्राइवर बोला हट जाओ नहीं तो गोली मार देगें। ये सुनते ही एएसआई जीतराम उन लोगों की मनशा भांप गए और अपनी रिवॉल्वर निकाल ली। ये सब देख एक अन्य गार्ड ने वायरलेस पर सभी गेट बंद करने के लिए कहा। उधर ड्राइवर ने हड़बड़ाहट में गाड़ी पत्थरों से भिड़ा दी। एकाएक गाड़ी में से पांच लोग निकले और विस्फोटक लगाने लगे। इससे ये पुख्ता हो गया कि ये आतंकी ही हैं। इसी बीच जीतराम ने अपनी रिवॉल्वर से एक आतंकी पर फायर कर दिया। गोली सीधे जाकर आतंकी के पैर में लगी। इसके बाद आतंकियों ने भी ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी और जीतराम वहीं गिर पड़े। आतंकी ग्रेनेड फेंकते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। अब संसद पूरी तरह धमाकों और गोलियों की आवाज से गूंज चुका था। इस वक्त संसद में 100 से ज्यादा सांसद और मीडियाकर्मी मौजूद थे। सभी नेताओं को संसद में बनी एक सीक्रेट जगह ले जाया गया। आडवाणी खुद उस समय संसद में मौजूद थे।
चार आतंकी मारे गए
संसद के सभी गेट बंद हो चुके थे। फोनलाइन्स डेड हो चुकीं थी। सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया था। आतंकियों को रोकने लिए लिए भारी फायरिंग भी हो रही थी। गोलीबारी से 3 आतंकी जख्मी होकर भी आगे बढ़ते रहे। वे सभी संसद के गेट नंबर 9 की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन गेट बंद देख 5 की तरफ भागने लगे। इसी बीच सुरक्षाकर्मियों ने फायरिंग करते हुए 3 को मार गिराया। एक जो लगातार ग्रेनेड फेंक रहा था उसे गेट नंबर 5 के पास ढेर कर दिया गया।
आतंकी मारे गए लेकिन जारी रहा अफवाहों का दौर
कुल 4 आतंकी मारे जा चुके थे, लेकिन 1 अभी भी जिंदा था। वो बड़ी तेजी से संसद के अंदर जाने के रास्ते की और बढ़ रहा था। उसने अपने शरीर पर कई विस्फोटक बांध रखे थे। वो खुद को ब्लास्ट कर संसद को उड़ाना चाहता था। अंदर जाने का रस्ता गेट नंबर 1 से होकर जाता था। इस गेट को भी बंद कर दिया गया था। ये देख आतंकी वहीं रुक गया। अचानक एक गोली आकर इस आतंकी के सीने में लगी और विस्फोटक फट गया। धमाके के साथ ही आतंकी भी मारा गया।
पांचों आतंकी मारे जा चुके थे लेकिन किसी भी सिक्युरिटी गार्ड को पता नहीं था कि संसद में कितने आतंकी घुसे हैं। इसलिए सुरक्षाकर्मी काफी धीरे-धीरे आगे बढ़े। आतंकियों द्वारा फेंके गए ग्रेनेड कुछ देरी से फटे जिससे उनके मरने के बाद भी उनकी संख्या का अंदाजा नहीं लग पाया। संसद पूरी तरह सुरक्षाकर्मियों के कब्जे में थी। इसके बावजूद वे एक-एक कदम फूंक कर रख रहे थे।
सांसदों को बंधक बनाना चाहते थे आतंकी
ये मुठभेड़ करीब 30 मिनट तक चली। धीरे-धीरे बम स्क्वॉड और स्पेशल एजेंसियों के लोग घटना स्थल पर पहुंचने लगे। जिस कार में आतंकी अंदर आए थे, उसकी जांच करने पर हथियार और विस्फोटक भी मिले। कार के अंदर 30 किलो आरडीएक्स रखा था। अगर इस कार में विस्फोट होता तो हालात और खराब हो सकते थे। गाड़ी में खाने का कुछ सामान भी मिला जिससे ये पता चला कि आतंकी सांसदों को बंधक बनाने की मंशा से यहां आए थे। सांसदों और मीडियाकर्मियों को बाहर निकालने से पहले सबके आई कार्ड की जांच की गई। तब सब सुरक्षित घर जा सके। इस हमले में कुल 9 लोगों की जान गई। जिनमें जांबाज सिक्युरिटी गार्ड जीतराम भी शामिल थे जिन्होंने सबसे पहले आतंकियों को देखा। इनके अलावा कुल 5 आतंकी भी मारे गए।
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