पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

यमुना पार, सेंट्रल दिल्ली में कल से 8 से 10 घंटे बिजली कटौती

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

नई दिल्ली। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की बिजली दरों में 50 फीसदी कटौती का लाभ जनता को अभी मिल भी नहीं पाया है कि एक बुरी खबर यह है। शनिवार यानी एक फरवरी से यमुना पार और सेंट्रल दिल्ली के इलाकों में 8 से 10 घंटे की बिजली कटौती होगी। दरअसल, इन इलाकों में बिजली वितरण करने वाली कंपनी बीएसईएस यमुना पॉवर लिमिटेड (रिलाइंस) के सीईओ अरविंद गुजराल ने दिल्ली के ऊर्जा सचिव पुनीत गोयल को खत लिखकर कहा है कि कंपनी की वित्तीय हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वह जनवरी में खरीदी गई बिजली का पूरा भुगतान नहीं कर सकी।

इसलिए एक फरवरी से एनटीपीसी, एनएचपीसी सरीखी उत्पादन कंपनियों से उन्हें बिजली मिलनी बंद हो जाएगी। गौरतलब है कि बीएसईएस यमुना पूर्वी दिल्ली व केंद्रीय दिल्ली के करीब साढ़े 13 लाख उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करता है। बीएसईएस यमुना कंपनी की बोर्ड मीटिंग 21 जनवरी को बुलाई गई थी लेकिन उस दिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रेल भवन पर धरने पर बैठे थे, इसलिए यह बैठक रद्द कर दी गई थी।

बैंकों ने भी ऋण देने से मना किया: गुजराल ने पत्र में लिखा है कि कंपनी के पास वितरण व ट्रांसमिशन कंपनियों को भुगतान के लिए धनराशि नहीं है। घाटा 6229 करोड़ रुपए तक पहुंचने के चलते सभी बैंकों ने भी ऋण देने से मना कर
दिया है।

जनवरी में एनटीपीसी व एनएचपीसी को देने के लिए 204 करोड़ रुपए भी नहीं थे। एनटीपीसी ने 84 करोड़ रुपए का लेटर ऑफ क्रेडिट भुना लिया, उसके बाद भी 120 करोड़ रुपए का बकाया रह गया। पत्र के मुताबिक, कोई भी लेटर ऑफ क्रेडिट न बचने और बैंक से कर्ज मिलने की कोई संभावना न बचने की वजह से बकाया भुगतान की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। ऐेसे में एनटीपीसी व एनएचपीसी की तरफ से 500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता कम हो जाएगी। इस परिस्थिति में एक फरवरी से कंपनी के लाइसेंस के इलाके यानी पूर्वी व केंद्रीय दिल्ली में 8 से 10 घंटे की कटौती करनी पड़ेगी। पूरा भुगतान न करने के चलते दामोदर वैली कॉरपोरेशन और एसजेवीएनएल ने पहले से ही 259 मेगावाट बिजली की कमी कर दी थी।

खरीद लागत के मुताबिक दरें तय न करने को ठहराया जिम्मेवार

गुजराल ने इस परिस्थिति के लिए बिजली की खरीद लागत के हिसाब से दरों को तय नहीं करने को जिम्मेवार ठहराया है। कंपनी के बिजली खरीद की लागत साल 2007-08 से 2011-12 के बीच 2.67 रुपए से बढ़कर 5.25 रुपए प्रति यूनिट हो गई है। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं से उन्हें जितनी राशि मिलती है उससे महज दिल्ली की उत्पादन व पारेषण कंपनियों का ही भुगतान कर सकते हैं। गुजराल ने अपने पत्र में गुहार लगाई है कि कंपनी में 49 फीसदी की भागीदार दिल्ली सरकार सुनिश्चित करे कि केंद्रीय उत्पादन कंपनियां एनटीपीसी, एनएचपीसी, डीवीसी आदि आपूर्ति जारी रखें। केंद्रीय वित्त मंत्रालय बैंकों को कर्ज जारी करने के निर्देश दे।


वितरण कंपनी की ओर से बिजली कटौती का पैंतरा तब सामने आया है जब केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आते ही राजधानी की तीनों वितरण कंपनियों के खातों की जांच कैग से कराने के आदेश दे दिए और सब्सिडी देकर बिजली की दरों में 50 फीसदी की कटौती कर दी। कैग की जांच के विरोध में कंपनियों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।