नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए शुक्रवार को आम जनता को बताया गया कि पुलिस को नगर निगम का आदेश नहीं होने पर अनधिकृत निर्माण कार्यों को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा, ‘हमने इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया है। हम आम जनता में जागरूकता लाना चाहते हैं कि पुलिस अधिकारियों को ऐसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है कि वे खुद से अनधिकृत निर्माण कार्यों को रोकें।’ पहले कुछ खबरें आती रहीं हैं कि पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर अवैध निर्माण कार्यों को रोकने के नाम पर कई लोगों से रिश्वत ली। बस्सी ने कहा, ‘संबंधित इलाके का थाना प्रभारी अवैध निर्माण रोकने के संबंध में नगर निगम के सक्षम अधिकारी के आदेश के साथ ही इस तरह के निर्माण को रोक सकता है।’ सर्कुलर के मुताबिक थाना प्रभारी दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 475 के अनुसार अवैध निर्माण के बारे में केवल संबंधित नगर निगम के अधिकारी को सूचित करेगा।
बस्सी के अनुसार एसएचओ की यह जिम्मेदारी भी होगी कि उनके अधीन कार्यरत कोई पुलिस अधिकारी रिश्वत लेने के लिए पद का दुरुपयोग नहीं करे।
खत्म होगी डिस्ट्रिक इनवेस्टीगेशन यूनिट
दिल्ली पुलिस मुख्यालय डिस्ट्रिक इनवेस्टीगेशन यूनिट (डीआईयू) को खत्म करने की तैयारी में है। डीआईयू का विलय जल्द ही इकनॉमिक आफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) में कर दिया जाएगा। इसके बाद ईओडब्ल्यू में कार्यरत सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कवायद के पीछे पुलिस मुख्यालय का मकसद ह्यूमन रिसोर्स का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ईओडब्ल्यू के काम के बोझ को कम करना है। डीआईयू का ईओडब्ल्यू में विलय का सबसे बड़ा फायदा उन शिकायतकर्ताओं को मिलेगा, जिनको कम आर्थिक हानि के चलते एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन का चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। पुलिस अधिकारी के अनुसार काम का दबाव अधिक होने के चलते आर्थिक अपराध शाखा में सिर्फ उन्हीं मामलो की जांच सौंपी जाती है जिनमें करोड़ों रुपए का आर्थिक घोटाला हो। वहीं साइबर क्राइम में इजाफे के साथ ही ईओडब्ल्यू के साइबर सेल की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं।
डीआईयू से आए पुलिस अधिकारियों की मदद साइबर सेल से जुड़े मामलों को बखूबी निपटाया जा सकता है।