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टीचर की नौकरी छोड़ आ गए थे दिल्ली, अब फोन पर कर देते हैं करोड़ों की डील

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. पंजाब में टीचर की नौकरी छोड़ने के बाद 21 वर्षीय कीमत राय 1958 में दिल्ली आ गए थे। तब उनके पास दस हजार रुपए थे। उन्होंने अपने अंकल के इलेक्ट्रिकल सामान के बिजनेस में हाथ बंटाया। काम समझ में आने पर उन्होंने खुद का बिजनेस करने का फैसला किया। केबल बेचने लगे। 1971 में दस लाख रुपए में आर्थिक संकट से गुजर रही हेवेल्स को खरीदा। पांच कंपनियों के अधिग्रहण से हेवेल्स को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी बनाने वाले कीमत राय 2007 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने के लिए जर्मन कंपनी सिलवेनिया का अधिग्रहण करना चाहते थे, जो हेवेल्स से 1.5 गुना बड़ी थी।
जब बेटे अनिल राय और सीएफओ राजेश गुप्ता डील के फायदे-नुकसान का आकलन कर रहे थे, तभी कीमत राय ने पांच मिनट में अधिग्रहण का फैसला कर लिया। अनिल डील साइन करने लंदन गए। रिस्क के चलते उन्हें रातभर नींद नहीं आई। उन्हें लग रहा था कि वे इस पर ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं। सुबह अनिल ने पिता को फोन कर कहा कि उन्होंने 23 करोड़ रुपए में डील फाइनल कर दी है। तब कीमत राय ने बेटे से कहा कि यह आंकड़ा ज्यादा मायने नहीं रखता, बल्कि जो होने जा रहा है वह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों : 77 साल के गुप्ता जून 2014 में अरबपति बने थे और अभी जारी फोर्ब्स की भारतीय अरबपतियों की सूची में उन्हें 48वां स्थान मिला है।
शिक्षा : बीच में ही छोड़ी
परिवार : पत्नी विनोद। बेटा अनिल कंपनी में ज्वाइंट एमडी है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए कीमत राय गुप्ता की तस्वीरें।