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मूंछोंं से पहचाने जाएंगे रावण, कुंभकरण और मेघनाद

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. रावण, कुंभकरण और मेघनाद की पहचान उनकी मूंछों से होगी। दरअसल, रावण के पुतला दहन के लिए तैयार किए जा रहे सभी पुतले दिन में बिल्कुल एक सरीखे हैं। ऐसे में रावण, कुंभकरण और मेघनाद की पहचान करने के लिए मूछों को आधार बनाया गया है। सबसे बड़ी मूछेंं रावण की हैं। उससे छोटी मूछें कुंभकरण की और सबसे छोटी मूछे मेघनाद की हैं। पुतला बनाने वाले कई कलाकारों ने रावण और कुंभकरण में अंतर करने के लिए त्रिशूल मूंछों का सहारा लिया है। रावण को बड़ी घुमावदार मूंछें लगाई गई हैं जबकि कुंभकरण को त्रिशूल की तरह दिखने वाली मूछें लगाई गई हैं।

बॉडी बिल्डर रावण की है सबसे अधिक मांग
रावण दहन के लिए रामलीला कमेटियां पुतलों को खास रूप में देखना चाह रही हैं। इस समय सबसे अधिक सिक्स पैक वाले रावण की सबसे अधिक मांग है। इसके अलावा बाईसेप्स, ऊंचे कंधे और बड़ी मूछों वाले रावण के पुतला रामलीला कमेटियों के बीच सबसे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रावण की साज सज्जा लेकर रामलीला कमेटियां चमकीले कागज से रावण के पुतले बनाने की मांग कर रहे हैं।

बारिश में भी नहीं गलेगा रावण का पुतला
कारीगर रावण के पुतलों को खास तरह के कागज से तैयार कर रहे हैं। इस कागज की खासियत है कि बारिश होने पर भी रावण के पुतले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। रावण बनाने वाले कारीगर महेंद्र के अनुसार पहले वे भारतीय कागज से रावण का पुतला तैयार करते थे। जो बाजार में 40 रुपए से 50 रुपए के बीच आसानी से उपलब्ध हो जाता था। अब वे रावण बनाने के लिए आयातित कागज का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो बाजार में करीब 125 रुपए से 150 रुपए के बीच उपलब्ध है। कागज का दाम बढ़ने से रावण के पुतलों की कीमत में भी फर्क आया है। अब रावण के पुतले तीन सौ रुपए प्रति फुट की दर से बिक रहे हैं।

नहीं दिखेंगे 10 सिर वाले रावण
रावण का नाम जहन में आते ही दस मुंह वाले भयावह रावण की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है। लेकिन इस बार रावण दहन के समय आपको दस मुंह वाले रावण बमुश्किल नजर आएंगे। इस बार ज्यादातर रावण एक मुंह वाले ही हैं। कारीगरों का कहना है कि दस मुंह वाले रावण को रामलीला मैदान तक ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसको देखते हुए अब ज्यादातर एक मुंह वाले रावण की ज्यादा मांग है।

इस बार करीब 25 सौ से अधिक रावण के पुतले का आर्डर आया है। जिसमें सिर्फ दो या तीन रावण के पुतले दस मुंह वाले हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़िए पुतले तो बनाते हैं लेकिन दहन नहीं देखते।