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डाउनलोड करेंनई दिल्ली । नव-प्रवर्तन के मामले में देश के पीछे रहने पर चिंता जाहिर करते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अनुसंधान पर व्यय में बड़े पैमाने पर वृद्धि किए जाने पर बल दिया है। उन्होंने निजी क्षेत्र से इस मामले में अपना अंशदान बढाने का आह्वान किया है। मुखर्जी ने शनिवार को यहां राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह में इस बात को रेखांकित किया कि नए पेटेंट के दावों के मामले में भारत, अमेरिका और चीन आदि से काफी पीछे है। उन्होंने कहा 'ऐसे मामलों में भारत का रिपोर्ट कार्ड बहुत उत्साहजनक नहीं है क्योंकि अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख देशों में सालाना जितने पेटेंट के आवेदन किया जाता है वह हमारे देश के मुकाबले लगभग 12 गुना है।'
भारत द्वारा 11 मई और 13 मई 1998 को पोखरन में किए गए भूमिगत परमाणु परीक्षण की याद में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अनुसंधान एवं विकास पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का 0.9 प्रतिशत खर्च किया है जो चीन, ब्रिटेन और इजराइल के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने कहा 'हमें नव-प्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान पर व्यय बड़े पैमाने पर बढ़ाना चाहिए।' इस मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री एस जयपाल रेड्डी, कई वैज्ञानिक, उद्यमी और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि देश के अनुसंधान एवं विकास में एक चौथाई का योगदान करने वाले निजी क्षेत्र को जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तरह इस कार्य पर व्यय बढ़ाना चाहिए। मुखर्जी ने कहा 'हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम नव-प्रवर्तन के क्षेत्र में दूसरों के साथ होड़ कर सकें और हम में समय पर काम पूरा करने की क्षमता हो। यदि हमारी प्रणाली मजबूत है तो विश्व हमारा सम्मान करेगा और हमारे साथ काम करना चाहेगा।' उन्होंने कहा कि नव-प्रवर्तन की क्षमता भारतीय वृद्धि और विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए।
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