नई दिल्ली. डीयू के रामजस कॉलेज में कर्मचारियों के निलंबन का मामला गरमा गया है। निलंबित कर्मचारियों की पुन: बहाली, कॉलेज प्रिंसिपल के खिलाफ यूजीसी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच के आधार पर प्रिंसिपल को हटाने और निलंबित कॉलेज लेक्चरर को बहाल करने की मांग को लेकर शुक्रवार को डूटा और डूक्कू ने कॉलेज में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर कॉलेज प्रिंसिपल की ओर से भेजे गए प्रेसनोट में स्पष्ट किया गया है कि जिन छह कर्मचारियों को निलंबित किया गया है उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज है और इनमें से दो कर्मचारी कॉलेज में फर्जी मार्कशीट के आधार पर हुए दाखिला रैकेट में लिप्त हैं। इन सभी के खिलाफ विश्वविद्यालय नियमों और गवर्निंग बॉडी की अनुशंसा पर ही कार्रवाई की गई है।
बाकी निलंबित किए गए लेक्चरर्स पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश के तत्वाधान में गठित जांच कमेटी जांच कर रही है और यूजीसी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट व वाइस प्रिंसिपल नियुक्ति को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मैटर सब-ज्यूडिस है। कोर्ट में विचाराधीन मुद्दे पर किसी प्रकार की बयानबाजी कर वह न्यायालय की अवमानना नहीं करना चाहते, क्योंकि जो सच होगा वह सबके सामने आ जाएगा।
उधर डूटा अध्यक्ष डा. नंदिता नारायण और डूक्कू अध्यक्ष राजपाल ने संयुक्त रूप से कॉलेज प्राचार्य डा. राजेंद्र प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2012 में यूजीसी ने वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रिंसिपल पर सवाल खड़े करते हुए जांच बिठाई थी, जिसकी रिपोर्ट आने पर भी प्रिंसिपल अपने खिलाफ कार्रवाई को लेकर हमेशा गुमराह करते रहे हैं।
इसके अलावा कॉलेज में वाइस प्रिंसिपल की नियुक्ति भी नियमों को ताक पर रखकर की गई। कॉलेज के कर्मचारियों को बे-वजह निलंबित कर दिया गया। जबकि हाल ही में एक लेक्चरर्स धनीराम को यौन उत्पीड़न के आरोप में गलत तरीके से निलंबित किया गया है, जिन्हें तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। इन सभी सवालों के जवाब पर प्रिंसिपल डा. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने डूटा अध्यक्ष डा. नंदिता नारायण को एक पत्र लिख प्रदर्शन करने से तीन दिन पहले सूचित किया था कि वह आकर मिलें और मामलों को समझें।
पहली बात तो यह कि डूटा ने बिना मुद्दों को समझे ही गलत बयानबाजी और प्रदर्शन किया। दूसरी बात यह कि जिन कर्मचारियों की बहाली को लेकर यह प्रदर्शन चल रहा है, उसमें से दिलबाग सिंह अपनी पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी है। निलंबित सुरेश चंद और राजे सिंह फर्जी दाखिला रैकेट में आरोपी हैं। चांद राम के खिलाफ भी वर्ष 2011 में आपराधिक मामला दर्ज है। ओमबीर सिंह के खिलाफ सेवानिवृत्त जज जांच कर रहे हैं और सुधांशु जो कॉलेज में प्रशासनिक अधिकारी रहा है, उस पर भी कई गंभीर आरोप हैं। इसे ईमेल, डाक और कई तरह से चार्जशीट की कॉपी भेजी गई। लेकिन उसने रिसीव नहीं की। न ही दस दिनों में जवाब दिया। तब जाकर यूनिवर्सिटी नियमों के तहत इसे निलंबित किया गया।