नई दिल्ली. यदि आपको देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स में इलाज कराना है तो आप अपने सांसद अथवा किसी वीआईपी की सिफारिश लाइए, आपको विशेष तवज्जो दी जाएगी, अन्यथा आपको महीनों संस्थान का चक्कर लगाना पड़ेगा। एम्स में रोजाना 5 से 10 सांसद लिखित में मरीजों के इलाज के लिए सिफारिश करते हैं। इसके अलावा फोन के जरिए रोजाना दर्जनों सिफारिशें की जाती हैं। भास्कर संवाददाता द्वारा आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ कि पिछले डेढ़ साल के दौरान एम्स के मात्र दो विभागों न्यूरो विभाग (तंत्रिका विभाग) और कार्डियो डिपार्टमेंट (हृदय विभाग) में 460 वीआईपी (सांसद, मंत्री, और अधिकारी) लोगों ने मरीजों के इलाज की सिफारिश की। इनमें से हृदय विभाग में 175 और न्यूरो विभाग में 285 वीआईपी ने लिखित में अनुरोध किया। आरटीआई में यह भी जानकारी दी गई है कि लिखित में सिफारिश करने के अलावा रोजाना फोन के जरिए भी दर्जनों सिफारिशें की जाती हैं। लेकिन इन सिफारिशों का कोई रिकार्ड नहीं है।
अन्य विभागों की जानकारी नहीं
एम्स में न्यूरो और कार्डियो डिपार्टमेंट के अलावा मुख्य एम्स, डॉ. भीम राव अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल, डॉ. आरपी सेंटर फॉर ऑप्थॉल्मिक साइंसेज सहित अन्य कई विभागों में रोजाना कई हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। मुख्य एम्स में नेफ्रो (किडनी), लीवर, गाइनी, पीडियाट्रिक सहित दर्जनों विभाग चल रहे हैं। यदि इन संस्थानों में भी वीआईपी लोगों की सिफारिश पत्र का औसत आंकड़ा एक लंबी सूची बन जाएगी। इसके अलावा अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी भी अपने परिचितों के इलाज में सिफारिश करते हैं। डॉक्टर के परिचित को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी जाती है।
सिफारिश होने पर होता है खास ख्याल
एम्स प्रवक्ता डॉ. अमित कुमार के मुताबिक सबसे पहले वीआईपी सिफारिशी पत्र की पड़ताल की जाती है, उसके बाद मरीज की बीमारी का रिकार्ड देखा जाता है और उसका ओपीडी कार्ड बनवाया जाता है। ओपीडी में डॉक्टर के अटेंडेंट को मरीज के बारे में बाकायदा जानकारी दी जाती है।
सामान्य मरीजों के नसीब में लंबा इंतजार
एम्स के कार्डियो और न्यूरो डिपार्टमेंट में मरीजों को 6 महीने से दो साल तक ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कइयाें को ऑपरेशन की डेट मिलने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया जाता है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन की दलील है कि बेड खाली नहीं होने से यह दिक्कत होती है।
केस हिस्ट्री : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के निवासी राकेश पांडेय के 12 वर्षीय पुत्र राहुल पांडेय के हार्ट की सर्जरी होनी है। राहुल को दो बार ऑपरेशन के लिए बुलाया गया, लेकिन दोनों बार उसे वापस लौटा दिया गया, दलील दी गई कि बेड खाली नहीं है।