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भारत-रूस शिखर बैठक में भाग लेने नई दिल्ली पहु्ंचे पुतिन

7 वर्ष पहले
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फोटो: मोदी-पुतिन की मौजूदगी में समझौते के दस्तावेज लेतीं सुषमा स्वराज।
नई दिल्ली. एक दिवसीय भारत दौरे पररूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। दोनों के बीच प्रतिनिधि स्तर की बैठक हुई। इसके बाद भारत तथा रूस के बीच 15वीं सालाना शिखर बैठक शुरू हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद अकबरुद्दीन ने ट्वीट करके बताया कि भारत और रूस ने तेल और गैस शोधन की दिशा में साझेदारी बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा, कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लान्ट की तरह ही दूसरी यूनिट लगाने के लिए जगह तलाशने पर भी भारत ने सहमति दी। यहां रूसी डिजाइन का न्यूक्लियर प्लान्ट लगाया जाएगा। दोनों देशों के बीच पेट्रोल-गैस, मिलेट्री ट्रेनिंग एक्सचेंज, परमाणु ऊर्जा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिचर्स से जुड़े 16 समझौतों पर दस्तखत हुए। समिट में दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल की दिशा में सामरिक रिश्तों को मजबूत करने पर भी बल दिया।
पुतिन का रूसी ट्वीट से किया स्वागत
पुतिन के भारत पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने खुशी जताई। पीएम ने रूसी भाषा में ट्वीट भी किया। पीएम ने लिखा, "राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। समय बदल गया है, लेकिन दोस्ती में कोई बदलाव नहीं आया है।"पुतिन ऐसे वक्त में भारत आ रहे हैं, जब यूक्रेन के मुद्दे पर वह पश्चिमी देशों के निशाने पर हैं। इसके अलावा, उनके देश की अर्थव्यवस्था भी खस्ताहाल है।
अमेरिका से भारत की नजदीकी से रूस खफा
पुतिन बुधवार रात भारत पहुंचे थे। अगर उनके पूरे कार्यक्रम का आकलन करें तो वह महज 22 घंटे ही भारत में रहेंगे। पुतिन का यह दौरा उतना गर्मजोशी से भरा नहीं होगा, जितना पूर्व रूसी राष्ट्रपतियों का रहा है। इसकी वजह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकियां, राष्ट्रपति बराक ओबामा का 26 जनवरी को मुख्य अतिथि के तौर पर दौरा और फाइटर जेट के लिए फ्रांस की रफेल कंपनी के साथ डील पर रूस की नाराजगी है। पुतिन का दौरा पहले दो दिनों का था, अब एक दिन का हो गया है।
पहले पुतिन संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने वाले थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है। नाराजगी भारत की तरफ से भी है। यह पाकिस्तान में सिविलियन एयरक्राफ्ट बिक्री को लेकर है। दैनिक भास्कर से बातचीत में भारत में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर कडाकिन ने कहा कि भारत एक चार्मिंग सुपर पावर है। इसे नए-नए दोस्त मिलेंगे। यह ध्यान रखना भारत का काम है कि नए दोस्त उसे धोखा न दें। ओबामा के भारत दौरे पर उन्होंने कहा कि यह राजनयिक का दौरा है।
रूस की भी जरूरत
> पुतिन को भारत से दोस्ती बढ़ाने की जरूरत ज्यादा है। यूक्रेन के मामले में पश्चिमी देशों के प्रतिबंध से रूसी अर्थव्यवस्था बुरे हाल में है।
> प्रतिबंध के बाद रूस को भारत से खाद्य पदार्थों का निर्यात बढ़ा है।
> अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ज़बरदस्त गिरावट से भी रूस की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है।
> रूसी मुद्रा रूबल इस समय काफी कमज़ोर है। रूस की कोशिश होगी कि वह भारत को सैन्य, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और व्यापार में अधिक सहयोग की पेशकश करे।
आगे की स्लाइड्स में देखें पुतिन के भारत पहुंचने की तस्वीरें...