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सुनंदा का 'S' फैक्टर, पैदा होने से मौत तक जिनके इर्द-गिर्द घूमती रही जिन्दगी

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. तीन शादियां, एक हाईप्रोफाइल केस में विवाद और अंतरराष्ट्रीय शख्सियत शशि थरूर से रिश्ता। पिछले चार साल से सुनंदा देश में कई बार सुर्खियां बनीं। इसे तकदीर का सितम कहें या फिर कुछ और। केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर मौत के बाद भी उतनी ही सुर्खियों में हैं, क्योंकि उनकी मौत कोई मामूली मौत नहीं है।
'जो होना होता है, वह होकर रहेगा' और 'हंसते हुए जाएंगे'... ये कुछ ऐसे अल्फाज़ हैं, जिनके बाद विश्वास और उमंग से भरी सुनंदा पुष्कर की यात्रा खत्म हो गई। 52 साल और 3 महाद्वीपों में फैली हुई जिंदगी एक छोटे-से किराए के कमरे में सिमट गई थी। सफेद चादर में लिपटा एक ऐसा चेहरा, जिसे सभी ने हमेशा मुस्कुराते ही देखा, वो चुप था, शांत था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कहानी तो यहीं से शुरू होती है। सुनंदा भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वो अपने पीछे एक ऐसे इत्तेफाक को जन्म दे गईं, जिसकी चर्चा होना लाजमी है। सुनंदा का 'S' फैक्टर, जी हां, यही है वो कहानी जिसके इर्द-गिर्द ही सुनंदा पुष्कर उर्फ पिंकी की पूरी जिंदगी घूमती रही।
कहानी शुरू होती है जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले से। श्रीनगर से 63 किलोमीटर दूर सोपोर इलाके में है एक छोटा-सा गांव बुमई। यही वो जगह है, जहां सुनंदा पुष्कर का जन्म हुआ और इस छोटे-से गांव से निकल कर वह देश भर ही नहीं, बल्कि विश्व में चर्चित हुईं। उनके जीवन में 5 'S' ऐसे रहे, जिनकी चर्चा नहीं की जाए तो शायद सुनंदा का नाम भी अधूरा ही रहेगा।
पहला 'S' खुद सुनंदा पुष्कर जिनका नाम 'S' से शुरू होता है। इसे इत्तेफाक ही कहेंगे कि उनकी जिंदगी से उनके नाम के अलावा 4 और ऐसे महत्वपूर्ण 'S' जुड़े जो शायद उनके नाम के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। बात यहीं खत्म नहीं होती। इन 5 'S' के अलावा भी सुनंदा का नाता 'S' के साथ रहा। पैदा होने से मौत तक 'S' का फैक्टर सुनंदा की जिंदगी में काम करता रहा।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए सुनंदा पुष्कर की जिंदगी से जुड़े अन्य 'S' फैक्टर...