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मनोचिकित्सकों की कमी से हो रही कैदियों की मौत, तिहाड़ में सिर्फ तीन डाक्टर

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. तिहाड़ जेल में मनोचिकित्सकों के अभाव के चलते लगातार कैदियों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं में इजाफा इजाफा हुआ है। आलम यह है कि तिहाड़ जेल में पिछले 15 दिनों के भीतर पांच कैदियों की मौत हा़े चुकी है। इन कैदियों में चार कैदियों ने खुदकुशी की, जबकि एक कैदी ने दूसरे कैदी की हत्या कर दी। तिहाड़ जेल में जान गंवाने वाले कैदियों और हत्या की वारदात में एक बात सामान्य पाई गई है। ये सभी कैदी मानसिक रोग से ग्रस्त थे। सिराजुद्दीन और अमलकर नबोकर नामक दो कैदियों की मौत के मामले में तिहाड़ प्रशासन ने भी स्वीकार किया है कि दोनों कैदी अवसाद से ग्रसित थे। ऐसे में तिहाड़ जेल प्रशासन द्वारा मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों की संख्या में इजाफा करने की बजाय कटौती करके की कवायद ने कैदियों के प्रति संवेदनशीलता पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार तिहाड़ जेल में इस समय करीब 500 एेसे कैदी हैं, जिनके मानसिक रोगों का इलाज तिहाड़ जेल में चल रहा है। इन मरीजों में रोजाना डी-एडिक्शन वाले करीब नए 25 कैदी शामिल हो जाते हैं। 80 से 100 कैदी डिएडिक्शन वार्ड में भर्ती है और 20 कैदी साइक्रेटिक वार्ड में भर्ती हैं। इसके अलावा शराब सहित अन्य नशे के आदी कैदियों को नशा न मिलने पर कई तरह के मानसिक रोगों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कैदियों की जिंदगी की हिफाजत के लिए मनोचिकित्सकों एक पूरी टीम की जरूरत तिहाड़ जेल में है। कुछ समय पहले तक तिहाड़ जेल में मानसिक कैदियों के इलाज के लिए छह मनोचिकित्सकों की टीम थी। जेल में मनोरोगियों की बढ़ती संख्या के बावजूद चिकित्सकों की संख्या को कम करके तीन कर दिया गया। जिसमें से एक डिप्टी मेडिकल सुप्रींटेंडेंट हैं और बाकी दो मनोरोगियों के इलाज में लगे हैं।
तिहाड़ जेल में अपनी सुविधा उपलब्ध करा रहे तीन मनोचिकित्सकों का अचानक अनुबंध रद्द कर दिया गया। इन मनोचिकित्सकों ने इस कार्रवाई को लेकर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल (कैट) के समक्ष गए। जिसमें कैट ने तिहाड़ जेल से हटाए गए तीनों मनोचिकित्सकों के पक्ष में फैसला दिया। बावजूद इसके तिहाड़ में न ही इन चिकित्सकों की बहाली की गई और न ही नए मनोचिकित्सकों की तैनाती हुई। जिसका नतीजा पिछले 15 दिनों में पांच कैदियों की मौत से सामने आ चुका है। अब देखना यह है कि तिहाड़ में मनोचिकित्सकों की कमी कितने और कैदियों की मौत की वजह बनती है।
फिर एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

तिहाड़ जेल में एक बार फिर विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। घटना गुरुवार देर शाम की है। पुलिस ने मृतक कैदी की शिनाख्त रिंकू के रूप में की है। पुलिस ने रिंकू के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही रिंकू की मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। सूत्रों के अनुसार मोती नगर निवासी रिंकू को लूट के मामल में पांच सितंबर को तिहाड़ जेल में भेजा गया था।
जिसके बाद से वह तिहाड़ की जेल संख्या एक में बंद था। गुरुवार को कोर्ट ने रिंकू की रिहाई के आदेश जारी किए थे। गुरुवार देर शाम जेल अधीक्षक रिहाई की सूचना देने के लिए रिंकू की सेल में पहुंचे, जहां वह अचेत पड़ा हुआ था। रिंकू को तत्काल जेल की डिस्पेंसरी ले जाया गया। डिस्पेंसरी के डाक्टरों ने रिंकू को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहीं दीन दयाल उपाध्याय ले जाने पर डाक्टरों ने रिंकू को मृत घोषित कर दिया। रिंकू की मौत को लेकर हरी नगर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।