नई दिल्ली. शिरोमणि अकाली दल एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा 1984 सिख कत्लेआम के मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी बनाने के फैसले का स्वागत किया है। दिल्ली इकाई के प्रधान मनजीत सिंह जीके ने एसआईटी गठित करने को लेकर आ रही खबराें पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अकाली दल ने इस मामले में बड़ी लंबी लड़ाई लड़ी है।
जिसके फलस्वरूप पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बातों को मौजूदा भारत सरकार द्वारा पूरी तव्वजो दी गई है। जीके ने कहा कि सरकारी रिकार्ड अनुसार देश में इस दौरान 3325 सिख मारे गए थे जिसमें 2733 दिल्ली से थे। पर बीते 31 वर्ष के दौरान केवल 30 व्यक्ति ही मुकदमों में दोषी साबित हो सके हैं।
दिल्ली कमेटी द्वारा कत्लेआम में मारे गए लोगों की याद में बनाई जा रही यादगार का जिक्र करते हुए जीके ने दावा किया कि कुल दर्ज हुई 587 एफआईआर में से दिल्ली पुलिस द्वारा बंद की गई 237 एफआईआर को फिर से खुलवाने के लिए दिल्ली कमेटी के 1984 सेल द्वारा सबूत इकट्ठे करके एसआईटी को देने की तैयारी कर ली गई है। बादल द्वारा इस मामले में भाजपा सरकार को लिखे गए पत्रों तथा केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, अरुण जेटली तथा हरसिमरत कौर बादल के साथ की गई मीटिंगों का हवाला देते हुए जीके ने कहा कि कांग्रेस सरकार के होते यह मसला कभी भी हल होने के करीब नहीं आया।
कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण, याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित
1984 दंगों के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे तीन आरोपियों की याचिकाओं पर दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों से गुरुवार को स्पष्टीकरण मांगा। अधिकार क्षेत्र के आधार पर ये लोग कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के साथ मामले को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगने के बाद याचिकाओं पर आदेश सुनाने के लिए मामले को 20 फरवरी के लिए मुल्तवी कर दिया। अदालत ने कहा, ‘मामला आज आदेश के लिए निर्धारित कर दिया गया। हालांकि, कुछ स्पष्टीकरणों की जरूरत है।’
पश्चिम दिल्ली के सुल्तानपुरी में सुरजीत सिंह की हत्या के मामले में सज्जन कुमार, ब्रह्मानंद गुप्ता, पीरीया और वेद प्रकाश हत्या और दंगा करने के आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।