नई दिल्ली. राजधानी में निर्मित होने वाले हर बड़े मकानों में सूरज की रोशनी लाने की कोशिश की जाएगी। बड़े मकानों में ग्रीन एनर्जी का खास प्रावधान होगा। इस बाबत मास्टर प्लान 2021 में संशोधन किया जा रहा है। एलजी नजीब जंग ने एक बैठक के दौरान डीडीए और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों को इस बाबत निर्देश दिया है। खास तौर पर 3000 वर्ग मीटर या इससे बड़े प्लॉटों पर निर्मित होने वाले मकानों में इस पर विशेष जोर दिया जाएगा।
दिल्ली में निर्मित होने वाले नए मकानों को पर्यावरण के अनुकूल बनाए जाने को लेकर डीडीए प्राइवेट कंसलटेंट की भी मदद लेगा। इस बाबत पुराने डिजाइन में भी परिवर्तन किया जाएगा। साथ ही एनओसी जारी करने से पहले मकान की गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक भविष्य में 3000 वर्ग मीटर या इससे बड़े प्लॉट पर होने वाले निर्माण के दौरान सोलर एनर्जी, ग्राउंड वाटर रिचार्ज, ड्यूल पाइप सिस्टम, बिजली खपत को कम करने के लिए मकानों के डिजाइन पर जोर दिया गया। डीडीए के उपाध्यक्ष बलविन्दर कुमार का कहना है कि समय के साथ अब मकानों के डिजाइनों में भी बदलाव की जरूरत दिखने लगी है। ऐसे में नए निर्माण के लिए ग्रीन एनर्जी पर जोर देना जरूरी है।
सूरज की रोशनी पर जोर : भवनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाए जाने के तहत कोशिश की जाएगी कि मकान में कम से कम रोजाना 2 घंटे सूरज की रोशनी जरूर पहुंचे। प्रिफैब तकनीक के जरिए निर्मित होने वाले मकानों में भी इस योजना को शामिल किया गया है।