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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दो दिन का धरना तो दे दिया पर अब मुश्किल में आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अर्जी मंजूर कर ली है। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी फटकार लगाई। उसके वकील एडीशनल सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा से पूछा, 'आप यह बताइए कि धरना स्थल पर धारा-144 लागू थी। वहां पांच से अधिक लोगों को जमा नहीं होने देना चाहिए था। लेकिन 500 लोग जमा हो गए। फिर हजारों आ गए। ऐसा होने क्यों दिया? क्या पुलिस ने आंखें मूंद रखी थी? शुरू से वहां गैरकानूनी जमावड़े की इजाजत क्यों दी गई?'
कोर्ट ने फिर नसीहत भी दी। कहा, 'कानून का पालन करवाने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी आंखों के सामने कानून टूटने न दे।' कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 31 जनवरी तक जवाब देने को कहा है। कोर्ट में लूथरा ने बताया कि मामले में दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। संवैधानिक पद पर रहते हुए रेलभवन के सामने धरना देने के मामले में केजरीवाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई है। वकील एमएल शर्मा और एन. राजारमन ने केजरीवाल के धरने के विरोध में याचिका लगाई थी। शुक्रवार को मामले की सुनवाई जस्टिस आरएम लोढ़ा और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की बेंच ने की।
सिद्धार्थ लूथरा की दलील
पुलिस लोगों को कम से कम 45 मिनट का मौका देती है। ताकि वे खुदबखुद हट जाएं। लेकिन तब तक वो लोग धरने पर बैठ चुके थे।'
कोर्ट का जवाब
नहीं ऐसा नहीं है। अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले को याद करिए। महज तीन मिनट में ढह गया था पूरा डब्ल्यूटीसी।'
कानून तोड़ा जाएगा तो हम दखल देंगे : कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर इस तरह के मामले में दखल का मतलब नहीं होता। लेकिन जब कानून तोड़ा जाएगा हम दखल देंगे। इसलिए यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण के दायरे में है। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया है। इसमें पूछा है कि क्या संवैधानिक पद पर रहने वाला व्यक्ति कानून की अनदेखी कर आंदोलन कर सकता है? जवाब देने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है।
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