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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जांच के तरीके के संबंध में अहम व्यवस्था दी है। कहा है कि अगर किसी मामले में जहर देकर हत्या का संदेह है तो मृतक का विसरा सुरक्षित रखना जरूरी होगा। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट के बाद विसरा फॉरेंसिक लैब में
भेजना होगा। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जे. चेलमेश्वर की बेंच ने यह व्यवस्था दी। सुप्रीम कोर्ट में पिछले दो माह में ऐसा तीसरा मामला आया, जिसमें किसी को जहर देकर मारने का संदेह था। लेकिन विसरा रिपोर्ट कोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई।
यह है मामला
बिहार के मधेपुरा की रहने वाली बिंदुला की शादी जयप्रकाश यादव से हुई थी। दहेज से नाखुश ससुराल वाले उसे प्रताडि़त करते रहे। जनवरी 1989 को बिंदुला की लाश नदी किनारे मिली। पड़ोसियों ने बताया कि बिंदुला को जहर देकर मारा गया। निचली कोर्ट ने पति और उसके परिवार के सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी थी। पति के भाई जोसिंदर यादव की सजा को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी।
सरकार से कहा- 44 डीम्ड यूनिवर्सिटी के मामले पर दोबारा गौर करें
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिए हैं कि वह 44 डीम्ड यूनिवर्सिटी के मामले पर दोबारा विचार करे। इस बारे में यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) से भी सलाह ली जाए। केंद्र इन यूनिवर्सिटीज को काली सूची में डालने की सिफारिश कर चुका है। कोर्ट ने यूजीसी से भी कहा कि वह मानदंड पूरे करने की डीम्ड यूनिवर्सिटीज की नाकामियों की रिपोर्ट पर गौर करे। वह केंद्र को सलाह दे। केंद्र ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लेगा। जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस विक्रमजीत सेन की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। बेंच ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी यूनिवर्सिटी को हरी झंडी नहीं दे रहा है। यूजीसी को ही उनकी रिपोर्टों पर गौर करना है।
यह है मामला: मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पीएन टंडन समिति ने 126 डीम्ड यूनिवर्सिटीज की जांच की थी। इनमें से 44 यूनिवर्सिटीज और संस्थान विभिन्न मानकों पर विफल पाए गए। इन्हें काली सूची में डालने की सिफारिश की गई। बहरहाल, मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त कराया था कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
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