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कालाबाजारी पर नकेल के लिए 20 टीमें तैनात, त्यौहारों पर खास व्यवस्था

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. त्यौहारों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में इजाफा न हो, इसे रोकने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। िदल्ली सरकार ने राजधानी में जमाखोरों व कालाबाजारी में लिप्त कारोबारियों के खिलाफ बड़ी व जल्द कार्रवाई के लिए 20 एन्फोर्समेंट टीमों का गठन किया है। इन टीमों में दानिक्स अधिकारियों के नेतृत्व में खाद्य आपूर्ति निरीक्षकों व लीगल मेट्रोलोजीकल अधिकारियों को शामिल किया गया है। खाद्य आपूर्ति आयुक्त सज्जन सिंह यादव ने बताया कि विभाग द्वारा गठित टीमें राजधानी में विभिन्न थोक व खुदरा प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेंगी और आवश्यक वस्तुओं की कथित जमाखोरी का पता लगाएंगी। पहले से पैक किए हुए डिब्बाबंद वस्तुओं की बिक्री में उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के भी कारगर कदम उठाये जा रहे है।
यादव ने बताया कि चावल, दालों, खाद्य तेल, खाद्य तेल के बीज आदि के लिए स्टॉक सीमा निर्धारित की है। निर्धारित सीमा से परे इन आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करने के लिए उत्तरदायी कारोबारी व्यक्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत अभियोजन लगाया जायेगा और सजा पर 6 साल तक की कैद हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वस्तु को मापने के साधन और वजन का वाट विभाग द्वारा प्रमाणित किया हुआ होना चाहिए।
उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए वजन तराजू-मशीन और अन्य उपकरण प्रमाणित हैं और प्रमाण पत्र में प्रमुखता से व्यावसायिक परिसर प्रदर्शित किया गया हो। इन प्रावधानों के उल्लंघन लीगल मेट्रोलोजी अधिनियम, 2009 के तहत दंडनीय अपराध है।
दिल्ली में बंद होंगी चारा व मावा मंडियां, खत्म होगा सरकारी नियंत्रण
दिल्ली में खोया व मावा और चारे पर सरकार अब अपना नियंत्रण खत्म करेगी। सरकार ने प्रस्ताव किया है कि राजधानी में पशुओं के चारे व खोया-मावा की मार्केटिंग का नियमन समाप्त हो। दिल्ली में फिलहाल टिकरी कलां (मंगोलपुरी) में दिल्ली चारा मंडी और बाग दीवार में खोया-मावा मंडी चल रही है और दोनों मंडियां घाटे में चल रही हैं। लंबे समय से दोनों मंडियां दूसरी मंडियों से उधार लेकर अपना काम चला रही हैं। दिल्ली के शहरीकरण होने के चलते व पशुधन-पशुपालन में कमी आने के कारण इनमें सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है। दिल्ली में कृषि के लिए बहुत ही कम जमीन बची हुई है। कृषि उपज में चारे का हिस्सा बहुत कम है, ऐसे में किसानों के लिए चारा पैदा करना और उसकी बिक्री करना कोई महत्व नहीं रखता। डेयरी भी कुछ खास इलाकों में हैं और वे दिल्ली के साथ लगने वाले एनसीआर के इलाकों से थोक में चारा खरीद लेते हैं ऐसे में मंडी की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है।
इसी तरह खोया व मावा के लिए मंडी परिसर न के बराबर है इसलिए सरकार इनके नियमन खत्म करना चाहती है। सरकार ने इस सुझाव की अधिसूचना जारी करते 45 दिन के भीतर संबंधित लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे हैं।