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डाउनलोड करेंनई दिल्ली। दूरसंचार क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जिम्मेदारी योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को सौंप दी गई है। आयोग में अभी तक परंपरा के अनुसार दूरसंचार से संबंधित मामले राज्यमंत्री के अधीन होते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब दूरसंचार से जुड़े मामले सीधे मोंटेक ही देखेंगे। ऐसा उनकी इंडस्ट्री से नजदीकी और निवेश जुटाने के मामलों में उनकी दक्षता को देखते हुए तय किया गया है। मोंटेक इस मामले में लगातार दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल से भी सलाह-मशविरा करेंगे।
असल में नई टेलीकॉम नीति में सरकार ने एक ही लाइसेंस से सभी सेवाएं देने का विकल्प पेश किया है। रिलायंस इंडस्ट्री के पास ब्रॉडबैंड का लाइसेंस है। माना जा रहा है कि नए एकीकृत लाइसेंस का दौर शुरू होते ही मुकेश अंबानी नीत रिलायंस इंडस्ट्री भी 'वॉयस' टेलीफोनी सेवा देना शुरू कर देगी। ऐसे में सरकार चाहती है कि टेलीकॉम सेक्टर में एक ऐसा चेहरा जरूर हो, जिसे इंडस्ट्री हितैषी और उनका दुख-दर्द समझने वाला समझा जा सके। इस तरह के संकेत देने के लिए सरकार ने मोंटेक को यह जिम्मेदारी दी है।
वित्त मंत्रालय के बाद योजना आयोग ही ऐसा एक निकाय है जो सीधे वित्तीय नीतिगत मामलों की रूपरेखा बनाता है। उसकी सुझाई गई नीति को सरकार न केवल तवज्जो देती है बल्कि बड़े स्तर पर उनका अनुपालन भी होता है। ऐसे में टेलीकॉम इंडस्ट्री को मोंटेक के जिम्मे देने से शुभ संकेत जाने की उम्मीद सरकार कर रही है। सरकार का आकलन है कि मोंटेक इस क्षेत्र में मौजूदा निवेश को बढ़ाने में सहायक होंगे।
इधर, आयोग में दूरसंचार से जुड़े मामलों को सीधे देखने की जिम्मेदारी संभालने के बाद आयोग ने बीएसएनएल-एमटीएनएल के पुनर्संरचना को लेकर होने वाली बैठक के लिए अपनी सलाह का खाका भी बना लिया है। शुक्रवार को हालांकि कानून मंत्री अश्विनी कुमार को लेकर उपजी अनिश्चितता की वजह से यह बैठक नहीं हो पाई।
सूत्रों के मुताबिक आयोग ने जो सुझाव तैयार किए हैं उसमें कहा गया है कि बीएसएनएल-एमटीएनएल का विलय अविलंब किया जाना चाहिए। आयोग ने इसके साथ ही सलाह दी है कि नए एकीकृत उपक्रम को 28 जोन में बांट दिया जाए। सभी जोन को एक स्वतंत्र लाभप्रद इकाई के तौर पर स्थापित होने का लक्ष्य दिया जाए।
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