नई दिल्ली.पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में 1984 के सिख दंगों में 400 सिखों की जान बचाने वाले एएसआई जुगती राम को न्याय दिलाने के लिए उनके परिजन प्रधानमंत्री से लेकर पुलिस आयुक्त के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जुगती राम के बेटे अनिल का कहना है कि पड़ोसी नानक चंद ने संसद हमले में मंत्रियों की जान बचाई तो शहीद करार दिया गया।
मेरे पिताजी ने 400 से अधिक सिखों की जान बचाई तो उन्हें सम्मानित करने के बजाय तत्कालीन डीसीपी सेवा दास ने काम में लापरवाही बरतने, दंगों के विषय में उच्चाधिकारी को सूचना नहीं देने व दंगाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करने के आरोप लगाते हुए सस्पेंड कर दिया। विभागीय जांच में निर्देश पाए गए। लेकिन ड्यूटी पर वापस नहीं लेने के कारण जुगती राम डिप्रेशन में चले गए और 10 जनवरी 2010 को मौत हो गई। परिजनों ने कहा कि अगर एएसआई को बहादुर पुलिस ऑफिसर का सम्मान नहीं मिला तो वे राष्ट्रपति भवन के बाहर धरना देंगे।
परिजनों के अनुसार विभागीय जांच में जुगती राम पर डीसीपी द्वारा लगाए गए आरोप झूठे निकले। बाद में नानावती आयोग ने भी जुगती राम पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए निदरेष करार दिया। इसके बाद भी मामला अदालत तक गया और पीडी शर्मा की रिपोर्ट पर 1986 में उन्हें बहाल कर लिया गया लेकिन विभाग ने मुकदमे को वापिस नहीं लिया। जब 400 सिखों ने कोर्ट में गवाही दी तब डीसीपी सेवा दास व एसीपी पीडी मल्होत्रा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
’84 दंगों के वक्त कल्याणपुरी थाने में तैनात थे जुगती राम
त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 20, 29, 30, 31,32 सबसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र थे। दंगों में सबसे अधिक मौत यहीं हुई थी। 30 और 31 को पूरी तरह दंगाइयों ने नष्ट कर दिया था इन दोनों ब्लॉकों में एक भी सिख जिंदा नहीं बचा था। थाना कल्याणपुरी में इमरजेंसी ऑफिसर तैनात जुगती राम को ब्लॉक 32 में एक नवंबर को दंगाइयों के एकत्र होने की सूचना मिली थी। केवल दो कांस्टेबलों के साथ मौके पर पहुंचे थे और डीसीपी, एसीपी, एसएचओ को वायरलेस पर दंगाइयों के एकत्र होने की सूचना दी थी।
सैकड़ों दंगाइयों से भिड़कर उन्होंने कई दंगाइयों को गिरफ्तार कर तीन मुकदमे दर्ज किए। खतरे को देखते हुए तीन सौ सिख परिवारों को कल्याणपुरी थाने के सामने टेंट बना कर रहने खाने की वयवस्था की। रात को सिखों के मुखिया रांझा सिंह व साधु सिंह ने दंगाइयों से डरकर चिल्ला नाला में 100 से अधिक सिख बच्चों महिलाओं के छुपने की सूचना दी।
थाने में उपस्थित डीसीपी, एसीपी, एसएचओ को मामले की सूचना देकर बच्चों को बचाने की गुहार लगाई। डीसीपी ने कोई मदद नहीं की फोर्स नहीं होने की बात कही। जुगत राम कुछ सिपाहियों के साथ चिल्ला नाला पंहुचे और दंगाइयों को स्टेनगन, डंडे के बदौलत रात के अंधेरे में खदेड़ते हुए पैदल रोते-बिलखते बच्चों एवं महिलाओं को शिविर में लाए थे।