नई दिल्ली. भले ही शैक्षणिक संस्थाओं की संख्या के मामले में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) दिल्ली से बेहतर है लेकिन विडंबना यह है कि आज भी पूरे एनसीआर के 35 फीसदी स्कूलाें में बालिकाओं के लिए टॉयलेट नहीं है। या यूं कहें की उपरोक्त फीसदी स्कूलों में लड़के-लड़कियां कॉमन टॉयलेट के उपयोग को मजबूर हैं।
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के वर्ष 2021 के लिए तैयार किए गए रिजनल प्लान के ड्रॉफ्ट में शैक्षणिक ढांचा को भी शामिल किया गया है। जिसमें बताया गया है कि एनसीआर क्षेत्र में निजी और सरकारी मिलाकर कुल 28284 स्कूल हैं। इनमें से 369 स्कूल ऐसे हैं, जो मात्र एक कमरे में चलते हैं।
इसके अलावा एक-एक अध्यापकों (सिंगल टीचर्स) के भरोसे 1321 स्कूल चल रहे हैं। इसी तरह 10012 स्कूलों (35.4 फीसदी) में लड़के और लड़कियों के लिए काॅमन टॉयलेट ही उपयोग करना पड़ता है।
दिल्ली में शिक्षा का स्तर एनसीआर के अन्य हिस्सों से बेहतर है, लेकिन शैक्षणिक संस्थाओं की संख्या के मामले में एनसीआर के पड़ोसी शहर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव,फरीदाबाद,
सोनीपत इत्यादि दिल्ली से बेहतर हैं।
एनसीआर के अंतर्गत आने वाले पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के इलाकों में एक फीसदी से भी कम प्राथमिक विद्यालयों में सिंगल टीचर हैं, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 3.5 फीसदी और हरियाणा के इलाकों में सर्वाधिक 16 फीसदी है।
आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आने वाले एनसीआर के इलाकों (मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर इत्यादि) में मात्र एक फीसदी से भी कम स्कूल सिंगल क्लासरूम वाले हैं। हालांकि मेरठ और बुलंदशहर में यह संख्या कुछ ज्यादा है। इसके विपरीत दिल्ली में यह आंकड़ा 3.5 फीसदी है। इसी तरह राजस्थान में 4.4 फीसदी और सर्वाधिक सिंगल क्लास वाले स्कूल हरियाणा में हैं। हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र (फरीदाबाद, गुडग़ांव, पलवल, रेवाड़ी इत्यादि) में स्थित 16 फीसदी स्कूल सिंगल क्लास वाले हैं।
दिल्ली की ज्यादा आबादी
एनसीआर क्षेत्र में स्थित दिल्ली के अलावा यूपी, राजस्थान और हरियाणा के भी इलाके शामिल हैं। लेकिन इनमें सर्वाधिक आबादी दिल्ली की है। वर्ष 2011 के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली की आबादी 1.67 लाख, हरियाणा के अंतर्गत आने वाले इलाकों की आबादी 1.10 लाख, राजस्थान के अंतर्गत आने वाले इलाकों की आबादी 36 लाख और यूपी के अंतर्गत आने वाले इलाकों की आबादी 1.45 लाख है। हालांकि दिल्ली में शिक्षा का स्तर 86.3 फीसदी, हरियाणा के इलाकों में 78.2 फीसदी, यूपी के इलाकों की 77.7 फीसदी और राजस्थान के इलाकों की 71.7 फीसदी है।