नई दिल्ली.राजधानी के 14 परिवहन कार्यालय पिछले दो महीने से वाहनों को रजिस्ट्रेशन पेपर नहीं दे रहे हैं। इस वजह से करीब एक लाख नए एवं सेकेंड हैंड वाहनों की आरसी परिवहन कार्यालयों में फंसी हुई है। इसका खामियाजा वाहन मालिकों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि बगैर आरसी के सड़कों पर चलने के कारण ट्रैफिक सार्जेंट 2000 हजार रुपए का जुर्माना लगा रहे हैं।
दूसरी तरफ परिवहन कार्यालयों में आरसी जल्दी देने के नाम वाहन मालिकों से दलाल चांदी काट रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस समस्या जिम्मेदार स्मार्ट कार्ड आपूर्ति करने वाली कंपनी बिगरे सॉफ्टेक को बताया है। जबकि कंपनी का कहना है कि कार्ड की आपूर्ति होते ही समस्या दूर कर ली जाएगी।
क्या कहते हैं मोटर लाइसेंसिंग अधिकारी : अपना नाम नाम नहीं छापने की शर्त पर एक दर्जन से अधिक एमएलओ ने बताया कि स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने वाली कंपनी बिगरे सॉफ्टेक के कारण वाहनों को आरसी नहीं मिल पा रही है।
सभी एमएलओ ने एक स्वर में विभागीय कार्रवाई का हवाला देते हुए बताया कि इस बारे में बिगरे, स्पेशल कमिश्नर, कमिश्नर सहित तमाम अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन बिगरे के लोग आरसी नहीं दे रहे हैं। जिसके कारण परिवहन कार्यालय में आकर वाहन मालिक कई बार आरसी के लिए हंगामा करते हैं और पुलिस बुलाना पड़ता है। प्रत्येक जोन में 5500 से लेकर 7500 तक वाहन फंसे हैं।
आरसी की रसीद, फिर भी चालान
आरटीओ कार्यालय की रसीद होने के बाद भी ट्रैफिक सार्जेंट एमवी एक्ट 39/192 के तहत 2000 रुपए का चालान काट देते हैं। जबकि ट्रैफिक सार्जेंट सब इंसपेक्टर दया राम के अनुसार आरटीओ से जारी आरसी की पर्ची की कानूनी मान्यता 21 दिन होती है।
'यह गंभीर आरोप है। इस तरह की दिक्कत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी।'
रमाकांत गोस्वामी, परिवहन मंत्री. दिल्ली सरकार
'कार्ड की सप्लाई में दिक्कत है। कार्ड ब्रिटेन से आता है। अप्रैल में आए 50 हजार कार्डो के चिप खराबी थी जिन्हें वापस कर दिया गया। तीन लाट का आर्डर दिया गया है जिसके आते ही किल्लत खत्म हो जाएगी।'
मो. इलियास, प्रोजेक्ट मैनेजर, बिगरे सोफ्टेक कंपनी