नई दिल्ली. दिल्ली में ई-रिक्शा पर लगी पाबंदी और ई-रिक्शा चालकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली अधिसूचना कब जारी होगी। इसे लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मु़ख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने 16 सितंबर को हुई मुलाकात का हवाला देते हुए 27 सितंबर तक ई-रिक्शा चालकों के लिए अधिसूचना जारी करने के वायदे पर भी सवाल खड़े किए हैं।
केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया है कि 28 सितंबर को उनके विभाग में पूछने पर पता चला कि ई-रिक्शा चालकों को राहत देने वाली अधिसूचना जारी होने में अभी समय लगेगा। अब परेशान होकर राजधानी के ई-रिक्शा चालक 8 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एकत्रित हो रहे हैं। केजरीवाल ने कहा है कि फरवरी 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को आदेश दिए थे कि दिल्ली में ई-रिक्शा के लिए उचित नियम बनाए जाएं। कोर्ट ने ई-रिक्शा की खूब तारीफ भी की थी। कोर्ट ने कहा था कि ई-रिक्शा पर्यावरण को दूषित नहीं करता।
साधारण रिक्शा में जिस तरह से एक आदमी दूसरे आदमी को खींचता है, ई-रिक्शा उस मामले में ज्यादा मानवीय है। कोर्ट आदेश के बाद भी कांग्रेस सरकार ने अगले चार माह तक कोई नियम नहीं बनाए। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने से अब तक चार माह बीत चुके हैं। भाजपा सरकार की ओर से भी इस दिशा में कोई नियम नहीं बनाए गए। अंत में कोर्ट ने ई-रिक्शा पर 31 अगस्त से पूरी तरह पाबंदी लगा दी। इसके बाद से दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा बंद हैं। इससे करीब ढाई लाख ई-रिक्शा चालक बेरोजगार हो गए।
ये ऐसे लोग हैं, जो पूरे दिन कमाते हैं और शाम को अपने बच्चों का पेट भरते हैं। इनके पास कोई बैंक-बैलेंस नहीं है। तो आप सोच सकते हैं कि पिछले 2 महीने से इनके घर का चूल्हा कैसे जल रहा होगा? केजरीवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि समस्या केवल ई-रिक्शा चालकों की नहीं है बल्कि लाखों दिल्ली वासियों की भी है, जिन्हें सस्ती और साफ-सुथरी सवारी मिलती थी।
आज वो लोग तकलीफ में हैं। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी कई बार कहते हैं कि रेड-टेप को खत्म किया जाएगा और व्यवसाय करना आसान किया जाएगा। ये सभी बातें अच्छी हैं। लेकिन सरकार बदलने के बाद अफसरशाही चार महीने में ई-रिक्शा पर नियम नहीं बना पाई।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि 17 जून को गडकरी ने रामलीला मैदान में ई-रिक्शा चालकों को जल्द ही नियमों में बदलाव कर राहत देने की बात कही थी उन्होंने ऐसा बिना कानूनी सलाह लिए किया। जबकि बात में कानूनविदों ने उन्हें जानकारी दी कि उनके द्वारा किए गए वायदों के हिसाब से नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके अलावा 15 सितंबर को देश के सभी अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर यह खबर थी कि दस दिनों में ई-रिक्शा चालू हो जाएंगे। आज लगभग 14 दिन हो गए अभी तक ई-रिक्शा चालू नहीं हुए। मुझे उम्मीद है कि 8 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सभी ई-रिक्शा चालकों के एकत्रित होने से पहले आप जरूर नियम लागू कर देंगे।