गांव की दो और महिलाओं ने भी कुछ इसी तरह की कहानी बताई। शिवकुमार ने 2003 में रामनगर गांव की एक और महिला के साथ बलात्कार किया था। सन 2003 में इस महिला ने एक केस भी दर्ज कराया था। हालांकि, यह महिला समाज के तानों से तंग आकर अब गांव छोड़ चुकी है। अब तक शिवकुमार पर दुष्कर्म के कुल छह मामले दर्ज हो चुके हैं। जिसमें 2011 में बलात्कार का शिकार हुई एक बार डांस भी शामिल है। जिसके लिए उसे सात महीने जेल में सजा भी काटनी पड़ी थी।
तिहाड़ जेल भेजा गया आरोपीगुडगांव की मल्टीनेशनल फाइनेंस कंपनी में कार्यरत 27 वर्षीय युवती से दुष्कर्म के आरोपी कैब चालक शिव कुमार यादव को तीस हजारी कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ भेज दिया गया। तीन दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने पर उत्तरी जिला पुलिस ने शिव कुमार को तीस हजारी कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार पांडेय की अदालत में पेश किया। अदालत के समक्ष मामले की जांच अधिकारी ने बताया कि शिव का
मोबाइल फोन और वारदात के समय पहने गए कपड़ों को बरामद कर लिया गया है। मामले की जांच अभी जारी है लेकिन अब आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कर लिए गए हैं? इसके अलावा क्या आरोपी की पहचान परेड कराई गई है ? जिस पर जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत पीड़िता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान आरोपी ने पहचान परेड कराने से इंकार कर दिया था। वहीं, आरोपी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है, अब शिव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने शिव से पूछा कि क्या वह कुछ कहना चाहता है। इस पर आरोपी का जवाब ना में था। जिसके बाद अदालत ने मामले के तथ्यों, प्रकृति, आरोपों की गंभीरता और जांच के अहम चरण में होने के चलते आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में 24 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्देश दे दिए।
असली जांच अधिकारी कौन है
अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या कंपनी ने आरोपी के ब्यौरे का सत्यापन कराया था। अगर नहीं तो पुलिस ने उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज किया है। इन सवालों पर अदालत ने गौर किया कि जांच अधिकारी ने सवालों के ठीक से जवाब दिया है। इस पर अदालत ने पूछा कि मामले का असली जांच अधिकारी कौन है, इनको कुछ भी जानकारी नहीं है। इस पर पुलिस ने बताया कि कैब कंपनी ने आरोपी के दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराया था। कैब कंपनी उबर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है।
वकीलों ने किया विरोध
शिव कुमार को तीस हजारी अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया। वकीलों ने पुलिसकर्मियों और आरोपी का रास्ता रोकने का प्रयास किया। आरोपी को जैसे ही अदालत में पेश किया गया वहां तीन दिन से हड़ताल पर बैठे वकीलों ने अदालत कक्ष में हंगामा करते हुए पेश वकील का विरोध किया। वकीलों का कहना था कि वे हड़ताल पर है कार्रवाई के लिए कोई वकील पेश नहीं होगा। मजिस्ट्रेट द्वारा हस्तक्षेप न करने के अनुरोध के बाद वकील शांत हुए।
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