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94. कम पसंद आया गूगल का एंड्रॉइड वन

7 वर्ष पहले
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सस्ते, बेहतर और भाषाओं के लिए सुविधाजनक गूगल का एंड्राइड वन भारत में लांच हुआ, लेकिन यूजर्स को कम भाया।

नंबर 94 पर इसलिए क्योंकिः
दावा किया गया था कि गूगल के एंड्राइड वन के जरिये स्मार्ट फोन की दुनिया बदलने वाली है, मोबाइल क्रांति आने वाली है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
फैक्ट फाइल:

• एंड्राइड वन गूगल का एक ऐसा विशिष्ट प्लेटफार्म है, जिसका उद्देश्य सस्ते और बेहतर स्मार्ट फोन बनाना है, जिसके फीचर गूगल कम्पनी तय करती है।
• गूगल ने एंड्राइड वन की मार्केटिंग पर ही अकेले 100 करोड़ का खर्च किया। मीडिया के सभी प्रारूपों में जमकर कैंपेन चलाया, लेकिन यूजर्स ने ज्यादा भाव नहीं दिया।
• माइक्रोमैक्स तथा कार्बन जैसी भारतीय कंपनियां एंड्राइड वन पर आधारित फोन बना रही है जिनकी कीमत 6,000 रुपये की रेंज में है। इनमें गूगल के सभी उपयोगी फीचर इनबुल्ट हैं।
• एंड्राइड वन में भारत के छोटे शहरों तथा कस्बों को ध्यान में रखते हुए इनमें भारत के लिए खास फीचर रखे गए हैं। एंड्राइड वन हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।
• भारतीय बाजार में एंड्राइड वन को अपेक्षित समर्थन न मिलने के पीछे चीन से आ रहे प्रीमियम रेंज के ज्यादा चलने वाली बैटरी वाले व अच्छेे कैमरा वाले फोन हैं जो 7 हजार से 20 हजार की रेंज में उपलब्ध हैं।
• स्मार्ट फोन बाजार में एंड्राइड की हिस्सेदारी 85 फीसदी, एप्पल की हिस्सेदारी 12 फीसदी तथा विंडोज की हिस्सेदारी 3 फीसदी है।
• आईडीसी के आंकड़ो के अनुसार भारत में स्मार्ट फोनों की बिक्री में 186 फीसदी की बढ़त हुई है, जिसमें से 78 फीसदी फोन 12,000 रुपये से कम बजट के थे।
• यूजर्स को एंड्राइड वन ज्यादा पसंद न आने के पीछे एक प्रमुख कारण यह सामने आया कि भारत में अभी अच्छा हार्डवेयर ज्यादा पसंद किया जा रहा है जबकि एंड्राइड वन का ज्यादा जोर सॉफ्टवेयर –ऑपरेटिंग सिस्टम पर है।