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88. वोडाफोन टैक्स विवाद सुलझा

7 वर्ष पहले
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे आयकर विभाग द्वारा अतिरिक्त टैक्स के रूप में मांगे 3,200 करोड़ रुपये देने की जरूरत नहीं है।

नंबर 88 पर इसलिए क्‍योंकि: वोडफोन भारत में निवेश करने वाली प्रमुख कंपनियों में हैं। यूपीए काल में कंपनी के टैक्स विवाद से निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों का रुख भारत के प्रति नकारात्मक हुआ था। अब स्थितियां ठीक हो रही हैं।
फैक्ट फाइलः
• वोडाफोन मूलत: ब्रिटेन की दूरसंचार कम्‍पनी है जिसका दुनियाभर में कारोबार है। भारत में वोडाफोन पिछले एक दशक से सक्रिय है।
• देश के आयकर विभाग ने वोडाफोन इंडिया द्वारा पैरेंट कंपनी को आवंटित एक राइट इश्यू में शेयरों के कम मूल्यांकन का आरोप लगाया था। टैक्‍स की यह मांग मार्च 2011 तक के दो वित्त वर्षों के लिए की गई थी।
• बताया जाता है कि भारत में वोडाफोन ने 8,000 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर जारी किए थे। वहीं, आयकर विभाग ने इसके लिए 53,000 रुपये प्रति शेयर पर आकलन किया था।
• आयकर विभाग का तर्क था कि कंपनी ने शेयरों का सस्ता मूल्यांकन किया है, इसलिए इस अंतर को वोडाफोन इंडिया की अंतरराष्ट्रीय सौदे से कर योग्य आय के रूप में देखा गया है।
• 10 अक्टूबर के फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने वोडाफोन ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे अतिरिक्त कर के रूप में मांगे गए 3,200 करोड़ रुपये देने की जरूरत नहीं है।
• भारत सरकार के अटार्नी जनरल मुकुल रोहतोगी ने आयकर विभाग को वोडाफोन टैक्स मामले में अपील नहीं करने की सलाह दी है।
• समझा जाता है कि रोहतोगी की सलाह के बाद आयकर विभाग के रुख में नरमी आ सकती है। इस सलाह का उद्योग परिसंघ फिक्की ने भी स्वागत किया है।