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तड़पता रहा घायल युवक, 108 एंबुलेंस की हड़ताल से अस्पताल पहुंचने में हुई देर; मौत

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जिगित्सा कंपनी द्वारा कर्मचारियों का वेतन काटा जाना और उसके बाद शुरू हुई 108 एंबुलेंस की हड़ताल ने जोशियाना मोहल्ला, किला गेट पर रहने वाले 18 साल के रिंकेश जोशी की जान ले ली। 

 

 

- दरअसल, गोला का मंदिर स्थित एक मोबाइल की दुकान पर काम करने वाले रिंकेश रविवार को दोपहर में खाना खाने घर जा रहे थे। तभी करीब 12 बजे हजीरा चौराहे के पास ट्रक एमपी 06 एचसी 1669 ने टक्कर मार दी। इस टक्कर से  रिंकेश उछलकर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। एक्सीडेंट के बाद घटनास्थल पर भीड़ तो जमा हो गई, लेकिन किसी ने रिंकेश को इलाज के लिए जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना उचित नहीं समझा। बल्कि फोटो और वीडियो बनाने में लगे रहे। कुछ देर बाद वहां पहुंचे राहगीर बॉबी शेखावत एवं प्रदीप परिहार ने 108 एंबुलेंस पर कॉल किया। जिस पर उन्हें 15 मिनट तक होल्ड पर कह दिया गया कि एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलेगी। तब वे ई-रिक्शा से रिंकेश को सिविल अस्पताल ले गए। वहां न डॉक्टर मिले और न ही एंबुलेंस। तभी डायल 100 आ गई और उससे रिंकेश को जेएएच ले जाया गया। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

 

प्रत्यक्षदर्शी: काश समय पर मिलती मदद, बच जाती जान

 

हम हजीरा से निकल रहे थे। तभी हमने देखा कि एक एक्सीडेंट हो गया है और घायल लड़का तड़प रहा है। वहां मौजूद लोग वीडियो बनाने में लगे थे। हमने 108 नंबर पर फोन किया तो उत्तर मिला, होल्ड पर रहो। 15 मिनट तक होल्ड पर रखने के बाद कहा कि   सॉरी, एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकती है। इसके बाद 100 नंबर पर भी फोन किया। 10 मिनट तक जब पुलिस नहीं आई तो हमने वहां से गुजर रहे ऑटो वालों से मदद मांगी लेकिन किसी ने मदद नहीं की। बड़ी मुश्किल से ई-रिक्शा वाला घायल को ले जाने के लिए  तैयार हुआ। इसके बाद हम दोनों उसे लेकर सिविल अस्पताल हजीरा पहुंचे। वहां गार्ड ने कहा कि यहां कोई डॉक्टर नहीं है, जेएएच ले जाओ। हमने गार्ड से कहा कि एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध करवा दो तो गार्ड ने बताया, एंबुलेंस वीआईपी ड्यूटी में टेकनपुर लगी हुई है। हम ई-रिक्शे से ही उसे लेकर जेएएच जाने लगे। हजीरा चौराहे पर डायल 100 मिल गई और घायल को उसमें बिठाकर जेएएच पहुंचाया, जहां पहुंचते पहुंचते उसकी मौत हो गई। कैजुअल्टी में डॉक्टर ने कहा कि इसकी मौत हो चुकी है। काश, यदि समय पर मदद मिल गई होती तो हम उसे बचा लेते।
- बॉबी शेखावत व प्रदीप परिहार, रिंकेश को जेएएच पहुंचाने वाले।

 

कुछ महीने पहले मां की मौत, मकान बचाने उधार ला रहे थे रुपए
रिंकेश के पिता दिनेश जोशी शनिवार को शनिदेव की प्रतिमा बर्तन में रखकर दान-दक्षिणा मांगने शहर में जाते थे। रिंकेश की मां की कुछ महीने पहले ही कैंसर से मौत हो गई थी। उनके मकान पर पड़ोस में रहने वाले लोग कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसका केस कोर्ट में चल रहा है और वकील की फीस भरनी थी। इसके लिए रिकेश ने रविवार को 2 हजार रुपए उन्होंने मालिक से उधार लिए थे।

 

 

दिनभर परेशान रहे मरीज, शाम को एक्शन में आए अफसर

 

शनिवार की शाम से रविवार शाम तक एंबुलेंस की हड़ताल के कारण शहर में न सिर्फ रिंकेश की मौत हो गई, बल्कि कई मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उसके बाद रविवार देर शाम को अधिकारी एक्शन मोड पर आए। सीएमएचओ डॉ. एसएस जादौन जिगित्सा कर्मचारियों के बीच पहुंचे और एंबुलेंस की चाबी मांगी, जिस पर कर्मचारियों ने मांगें पूरी न होने तक चाबी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद संघ के पदाधिकारियों को गोले का मंदिर थाना बुलाया गया और महाराजपुरा सीएसपी ने हड़ताल खत्म करने की बात कही, लेकिन कर्मचारियों ने पुलिस प्रशासन की भी  नहीं सुनी। भोपाल में हड़तालियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद सीएमएचओ शाम करीब 6.30 बजे फिर गोले का मंदिर थाने पहुंचे और कर्मचारियों से बोले कि अगर चाबी नहीं दोगे तो छीन ली जाएंगी, अन्यथा काम पर लौट आओ। इसके बाद कर्मचारी शाम 7 बजे काम पर लौट आए।

 

 

 

 

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