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कर्नाटक की घटना के बाद मोदी-शाह के बीच बढ़ी दूरियां

3 वर्ष पहले
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अहमदाबाद। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के अनुसार कर्नाटक में भाजपा की दुर्गति के लिए भाजपाध्यक्ष अमित शाह की जिद ही जिम्मेदार है। पीएम मोदी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की जिद के कारण कई बार नकारात्मक  परिणाम मिले हैं। उनकी जिद के कारण कई बार पार्टी में कलह भी उत्पन्न हुई है। आनंदीबेन को अलग-थलग कर दिया गया….

 

अमित शाह का जिद्दी स्वभाव का अनुभव गुजरात को कई बार हुआ है। इसमें विशेषकर नरेंद्र मोदी के पीए बनने के बाद गुजरात जब मोदी की अनुपस्थिति हुई, तब शाह ने अपनी जिद को चलाने का प्रयास किया। उस समय मोदी की विश्वासपात्र अानंदीबेन पटेल को गुजरात की बागडोर देकर मोदी दिल्ली चले गए। बस यही वक्त था, जब आनंदीबेन और अमित शाह के बीच दूरिया बढ़ीं और दोनों ने अपने-अपने गुट बना लिए। 2014 के बाद गुजरात में भाजपा दो भागों में विभाजित हो गई।

 

ले ली आनंदी बेन की कुर्सी

वर्ष 2014 के बाद गुजरात में आनंदीबेन और अमित शाह के बीच शीतयुद्ध अपनी चरमसीमा पर पहुंच गया था। इतना ही नहीं अमित शाह के कारण आनंदी बेन को दो साल में ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके पीछे यही वजह थी कि अमित शाह बार-बार कह रहे थे कि जिनकी उम्र 75 साल हो गई है, उन्हें भाजपा दरकिनार करेगी। किंतु आनंदी बेन के इस्तीफे के बाद ही शाह ने अपनी वाणी बदल दी।

 

भाजपा को 2017 के चुनाव में भुगतना पड़ा खामियाजा

शाह की जिद का परिणाम 2017 में गुजरात राज्यसभा के चुनाव के दौरान दिखाई दिया। इसमें 3 सीटों पर राज्यसभा के चनुाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल के खिलाफ भाजपा ने एक और उम्मीदवार खड़ा कर अहमद पटेल किो हराने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया था। उस समय अमित शाह को राष्ट्रीय नेताओं ने सलाह दी थी कि वे ऐसा न करें, पर उन्होंने अपनी जिद को ही आगे रखा, परिणाम यह हुआ कि अहमद पटेल जीत गए। भाजपा के प्रत्याशी की हार हुई।

 

मोदी नहीं चाहते थे कि कर्नाटक में फजीहत हो

इसके बाद शाह की रणनीति के खिलाफ सवाल उठने लगे। इसी के अनुसार कर्नाटक में मिली हार से उच्च स्तर पर यही कहा जा रहा है कि यह शाह की जिदं का ही परिणाम है। 2019 के चुनाव को देखते हुए कर्नाटक चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए लिटमस पेपर था, अब वहां मिली हार से मोदी-शाह के बीच दूरियां बढ़ गई हैं, ऐसा कहा जा रहा है।