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एक वर्ष पहले पकड़ा गया था ठगी का आरोपी, पर थाने से छूट गया
लालपुर पुलिस ने फर्जी आईबी अफसर बनकर 100 से अधिक बेरोजगारों से चार करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी करने के आरोपी शेखर कुमार को शनिवार को जेल भेज दिया। लेकिन, कहा जा रहा है कि यदि रांची पुलिस ईमानदारी बरतती तो शेखर सालभर पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच जाता। क्योंकि, ठगी के शिकार युवकों ने सदर थाना क्षेत्र में 26 फरवरी 2019 को ही शेखर को पकड़ लिया था। लेकिन, शेखर ने 100 नंबर पर कॉल कर सदर पुलिस को बुला लिया। पुलिस युवकों समेत उसे सदर थाना ले गई, वहां शेखर ने युवकों पर अपहरण का आरोप लगा दिया था। फिर दोनों पक्षों में समझौता कराकर शेखर को थाने से ही छोड़ दिया। यदि उसी वक्त पुलिस कार्रवाई करती तो आज अन्य बेरोजगार युवक ठगी से बच गए होते।
ये हैं शेखर के सहयोगी
{मोहम्मद नाजिम : पलामू, पांकी। वर्तमान में कर्बला चौक, थाना लोअर बाजार, रांची
{दीपक उर्फ गौतम चौरसिया : बड़कागांव, हजारीबाग।
इनसे की है ठगी
{अशोक कुमार, बड़कागांव : 4.5 लाख रु.
{विकेंद्र प्रसाद : 3.5 लाख रुपए
{पंचम कुमार : 4.5 लाख रुपए
{अमलेश कुमार : 2 लाख रुपए
{राजनाथ कुमार : 3.5 लाख रुपए
{कुंदन कुमार, बोकारो से : 2.5 लाख रु.
{भीम महतो : 2.5 लाख रुपए
{बालेंदु कुमार, रांची से : 2.5 लाख रुपए
{अविनाश कुमार : 2.5 लाख रुपए
शादी के कुछ माह बाद ही हो गया तलाक : शेखर के गांव के एक परिचित कोकर की सरना टोली में रहते थे, जिनके यहां वह रहने लगा। 2016 में उसकी शादी हुई, लेकिन कुछ ही महीने में तलाक भी हो गया। इसके बाद आईबी अफसर का फर्जी पहचान पत्र बनाकर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों को ठगने लगा।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक द्वितीय वर्ष तक पढ़ा है शेखर
शेखर दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक द्वितीय वर्ष तक पढ़ा है। जेल जाने से पूर्व शनिवार को उसने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कई खुलासे किए। उसने झुमरीतिलैया से 12वीं करने के बाद अपने फूफा के यहां दिल्ली चला गया। वहां उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी में नामांकन कराया। वर्ष 2012 में वह अपने गांव लौट आया।
आरोपी रांची में राजनीति में इंट्री की कर रहा था कोशिश
4 करोड़ की ठगी का मामला... पुलिस की लापरवाही से शेखर का हौसला बढ़ा