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डाउनलोड करेंपटना/मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर के एसएसपी रहे विवेक कुमार के ठिकानों पर एसवीयू (स्पेशल विजिलेंस यूनिट) की जांच तीसरे दिन भी जारी रही। बुधवार को जांच टीम ने मुजफ्फरनगर (यूपी) में 2 बैंक लॉकर खोले। इनमें एक लॉकर में 1.65 करोड़ के एफडी के पेपर व 18 लाख के जेवर मिले। दूसरे लॉकर में 12 लाख कैश, 1.75 लाख के गहने मिले। इस बीच खुलासा हुआ है कि विवेक ने मुजफ्फरपुर में ज्वाइन करने के 7 माह बाद एक दिन में ही पत्नी निधि कुमारी के नाम एक-एक लाख के 22 फिक्स डिपॉजिट कराए थे। ये एफडी मुजफ्फरनगर के अंसारी रोड स्थित एसबीआई शाखा में 13 नवंबर 2016 को कराई गई थी।
विवेक ने मुजफ्फरपुर में अप्रैल 2016 में ज्वाइन किया था। मंगलवार को उनके मुजफ्फरनगर स्थित ससुराल में 6 बैंक लॉकर की चाबी मिली थी। अन्य लॉकर को खोलने की कवायद चल रही है। देर शाम विवेक के सहारनपुर स्थित पैतृक घर से एलआईसी के लाखों की 7 पॉलिसी के कागजात मिले हैं।
पर्सनल लैपटॉप जब्त, कई राज खुलने की संभावना
जांच टीम ने विवेक कुमार के पर्सनल लैपटॉप को भी जब्त कर लिया है। उसकी जांच की जा रही है। लैपटॉप को खोलने में उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब पूर्व एसएसपी ने कोड भूलने की बात कही। हालांकि बाद में कोड याद आने पर लैपटॉप खोला गया। लैपटॉप में अवैध संपत्ति से जुड़े राज होने की संभावना है।
1.65 की एफडी के पेपर समेत 2 लॉकर में मिली दो करोड़ की संपत्ति
विवेक कुमार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर में एसएसपी रहने के दौरान पत्नी और ससुराल वालों के नाम 1.27 करोड़ रुपए के 91 फिक्स्ड डिपॉजिट कराए गए। इसमें ससुर वेद प्रकाश और सास उमारानी कर्णवाल के नाम पर 34 फिक्स्ड डिपॉजिट में 60.8 लाख रुपए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक दिन में ही सास-ससुर के नाम कई फिक्स्ड डिपॉजिट हुए। सारे फिक्स्ड डिपॉजिट के कागजात व ब्योरा स्पेशल निगरानी यूनिट की टीम को मिलने के बाद अब सभी को फ्रीज कर दिया गया है। इधर, मुजफ्फरपुर स्थित सरकारी आवास की जांच में कई महत्वपूर्ण पेपर मिले हैं।
शराब के खिलाफ पुलिसिया ऑपरेशन की भी जांच
पूर्व एसएसपी के कार्यकाल में हुए शराब के खिलाफ ऑपरेशन से जुड़ी फाइलों को भी जांच टीम खंगाल रही है। जांच की जा रही है कि उनके स्तर पर किसी तरह की गड़बड़ी की गई है या नहीं। खासकर कुछ संगीन मामलों में पूर्व एसएसपी की भूमिका संदेह के घेरे में है। चर्चा यह भी है कि एक लोकल शराब माफिया को हत्या के संगीन मामले में बचाया गया था। उस माफिया को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है।
आवासीय ऑफिस की गोपनीय शाखा में किसने रखा अवैध कारबाइन?
जांच टीम के सामने अहम सवाल यह भी है कि विवेक के आवासीय ऑफिस की गोपनीय शाखा में मिले अवैध कारबाइन को किसने रखा था? यह शाखा रीडर के प्रभार में होती है। उसने खुद या किसी के इशारे पर रखा था। फिलहाल वह फरार है।
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