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डाउनलोड करेंग्वालियर. जिला प्रशासन इस बार गणेश चतुर्थी व नवरात्र में मिट्टी की प्रतिमाआें को बढ़ावा देने के लिए अभी से अभियान चलाएगा। कलेक्टर राहुल जैन सोमवार को समय सीमा की बैठक के बाद निगम अफसरों के साथ बैठकर इसकी रणनीति बनाने पर चर्चा करेंगे। कलेक्टर का कहना है कि इस मामले में न केवल अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी बल्कि समाज के हर वर्ग को इस अभियान में शामिल कर समझाएंगे कि पीओपी न सिर्फ पर्यावरण आैर नदी-बांधों को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि आस्था पर भी चोट करता है।
दैैनिक भास्कर ने 17 मई के अंक में हे देवी हमें माफ करना, रमौआ डैम में शारदीय नवरात्रि पर विसर्जित प्रतिमा का 229 दिन बाद भी ये है हाल...शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। भास्कर ने फोटो के जरिए यह समझाने की कोशिश की थी कि पीओपी से बनी देवी की प्रतिमा पानी में न घुलने से देवी प्रतिमाओं का अपमान भी हो रहा है। कलेक्टर राहुल जैन ने स्वीकार किया कि दो साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने पीओपी की मूर्तियों पर बैन लगाने के आदेश दे दिए थे। लेकिन अभी तक आदेश के क्रियान्वयन को लेकर शहर में कोई ठोस काम नहीं हुअा है।
एक साल पहले चिन्हित किए थे मूर्तिकार
साल भर पहले निगम ने शहर में पीआेपी की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों को चिन्हित किया था। लेकिन पीओपी की मूर्तियाें पर रोक नहीं लग सकी। निगम के जोनल अफसर कार्रवाई करने तब जाते थे जब मूर्तियां बनकर तैयार हो जाती थी। अंत में आस्था के सवाल पर उन्हें बेचने की अनुमति दे दी जाती थी।
अभी से प्रशासन सक्रिय होगा, तो ही लगेगी पीओपी की मूर्तियों पर रोक
राज्यपाल से राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त मूर्तिकार दिनेश प्रजापति ने बताया कि जिला प्रशासन अभी से सक्रिय होगा, तो ही पीओपी की मूर्तियों पर रोक लग पाएगी। ग्वालियर में नई सड़क, जीवाजीगंज, गोल पहाड़ियां, नाका चंद्रवदनी में 20-25 परंपरागत मूर्तिकार ही मूर्तियां बनाया करते थे। अब स्थिति यह है कि करीब सौ मूर्तिकार ऐसे हैं जो दूसरे राज्यों से लेबर को बुलाकर पीओपी की मूर्तियां तैयार कराते हैं। ट्रांसपोर्ट नगर और इसके आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध रूप से पीओपी की मूर्तियां तैयार होती हैं। इन्हें रोकने प्रशासन को अभियान चलाना चाहिए। पीओपी की 5 फीट की मूर्ति मात्र एक हजार रुपए में वह भी दो घंटे में तैयार हो जाती है। लेकिन इतनी ही बड़ी मिट्टी की मूर्ति बनाने में 8 से 10 दिन का समय व 5 से 6 हजार रुपए तक का खर्च आता है। इसलिए भी शहर में बड़ी संख्या में पीओपी की मूर्तियां बनती हैं।
ग्वालियर कलेक्टर राहुल जैन ने बताया कि दैनिक भास्कर ने जो अभियान शुरू किया है, उसे अंजाम तक हम पहुंचाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं और हमें उनका पालन कराना है। मैं व्यक्तिगत तौर पर नगर निगम के अफसरों से पीओपी की मूर्तियांे पर रोक लगवाने व मूर्तिकारों तथा समाज के हर वर्ग को मिट्टी की मूर्ति बनाने को लेकर जागरूक करने अभियान चलाऊंगा।
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