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डाउनलोड करेंरांची. झारखंड में सबसे पहले पीजी योग कोर्स की पढ़ाई रांची यूनिवर्सिटी में शुरू हुई थी। दो वर्षीय इस कोर्स की बढ़ती मांग को देखते हुए आरयू प्रशासन ने इसी सत्र से योग में पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इन दोनों कोर्सों का सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी, ताकि विवि के एकेडमिक काउंसिल की बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाए।
- पीजी डिप्लोमा कोर्स एक वर्ष का होगा। इसमें छह-छह माह के दो सेमेस्टर होंगे। वहीं एडऑन सर्टिफिकेट कोर्स छह माह का होगा। इस कोर्स में कामकाजी लोग या दूसरे कोर्स की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स एडमिशन ले सकते हैं। बताते चलें कि एक माह पहले वीसी डॉ. रमेश पांडेय ने एक कार्यक्रम के दौरान पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की घोषणा की थी।
लोगों में योग के प्रति बढ़ रहा है रुझान
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अस्तित्व में आने के बाद विश्व में योग को तेजी से अपनाया जा रहा है। भारत में योग के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। योग अब महज शरीर को स्वस्थ रखने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह करियर बनाने के लिए अवसर भी दे रहा है।
प्रशिक्षक की है कमी
एसोचैम के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि देश में तीन लाख योग प्रशिक्षकों की कमी है। अध्ययन के अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया में योग प्रशिक्षकों की मांग सबसे अधिक है। भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के लिए इसका सबसे बड़ा निर्यातक है। अनुमान है कि चीन में भारत के 3,000 योग प्रशिक्षक काम कर रहे हैं।
ग्रेजुएशन के बाद कोर्स
योग के फील्ड में करियर की शुरुआत ग्रेजुएशन के बाद की जा सकती है। योग में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कई डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। मास्टर इन आर्ट्स (योग), पीजी डिप्लोमा इन योग थैरेपी कोर्सेज की अच्छी डिमांड है। योग एक्सपर्ट या नैचूरोपैथ के तौर पर करियर विकसित करना है तो साढ़े पांच साल का बैचलर ऑफ नैचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज (बीएनवाईएस) किया जा सकता है।
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