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अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें देवी लक्ष्मी की पूजा, ये हैं शुभ मुहूर्त

इस दिन यदि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपाय व पूजा की जाए तो घर में स्थाई रूप से धन-संपत्ति का वास रहता है।

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 05:00 PM IST
akshay tritiya on 18 april, do goddess lakhsmi worship by this method.

यूटिलिटी डेस्क. इस बार 18 अप्रैल, बुधवार को अक्षय तृतीया है। मान्यता है कि इस दिन यदि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपाय व पूजा की जाए तो घर में स्थाई रूप से धन-संपत्ति का वास रहता है। इस साल अक्षय तृतीया पर आयुष्मान और सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इससे पहले एेसा संयोग 16 अप्रैल 1877 को बना था। इससे पहले 2007 में आयुष्मान योग था लेकिन सिद्धि योग नहीं था। इस तरह 1996, 1942, 1904 और 1896 में भी अक्षय तृतीया पर आयुष्मान योग बना था लेकिन सिद्धि योग नहीं था। इस तरह 18 अप्रैल बुधवार को दुर्लभ संयोग में पड़ रही अक्षय तृतीया बहुत खास हो गई है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा इस प्रकार करें-

पूजन विधि
पूजा के लिए किसी चौकी अथवा कपड़े के पवित्र आसन पर माता महालक्ष्मी की मूर्ति को स्थापित करें। श्रीमहालक्ष्मीजी की मूर्ति के पास ही एक साफ बर्तन में केसर युक्त चंदन से अष्टदल कमल बनाकर उस पर गहने या रुपए रखें व पूजा करें। सबसे पहले पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके स्वयं पर जल छिड़के तथा पूजा-सामग्री पर निम्न मंत्र पढ़कर जल छिड़कें-

ऊं अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।

उसके बाद जल-अक्षत (चावल) लेकर पूजन का संकल्प करें-

संकल्प-आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, शनिवार है। मैं जो कि अमुक गोत्र (अपना गोत्र बोलें) से हूं। मेरा अमुक नाम (अपना नाम बोलें) है। मैं श्रुति, स्मृति और पुराणों के अनुसार फल प्राप्त करने के लिए और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मन, कर्म व वचन से पाप मुक्त होकर व शुद्ध होकर स्थिर लक्ष्मी प्राप्त करने के लिए महालक्ष्मी की पूजा करने का संकल्प लेता हूं। ऐसा कहकर संकल्प का जल छोड़ दें।
अब बाएं हाथ में चावल लेकर नीचे लिखे मंत्रों को पढ़ते हुए दाहिने हाथ से उन चावलों को लक्ष्मी प्रतिमा पर छोड़ते जाएं-

ऊं मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञ समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयन्तामोम्प्रतिष्ठ।।

ऊं अस्यै प्राणा: प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा: क्षरन्तु च।

अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन।।

अब इन मंत्रों द्वारा भगवती महालक्ष्मी की पूजा करें।

ऊं महालक्ष्म्यै नम:- इस नाम मंत्र से भी उपचारों द्वारा पूजा की जा सकती है।
प्रार्थना- विधिपूर्वक श्रीमहालक्ष्मी का पूजन करने के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें-

सुरासुरेंद्रादिकिरीटमौक्तिकै-
र्युक्तं सदा यक्तव पादपकंजम्।
परावरं पातु वरं सुमंगल
नमामि भक्त्याखिलकामसिद्धये।।
भवानि त्वं महालक्ष्मी: सर्वकामप्रदायिनी।।
सुपूजिता प्रसन्ना स्यान्महालक्ष्मि नमोस्तु ते।।
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्।।
ऊं महालक्ष्म्यै नम:, प्रार्थनापूर्वकं समस्कारान् समर्पयामि।

प्रार्थना करते हुए नमस्कार करें।

समर्पण- पूजा के अंत में कृतोनानेन पूजनेन भगवती महालक्ष्मीदेवी प्रीयताम्, न मम।

यह बोलकर समस्त पूजन कर्म भगवती महालक्ष्मी को समर्पित करें तथा जल छोड़ दें व माता लक्ष्मी से घर में निवास करने की प्रार्थना करें।


ये हैं अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त

सुबह 06:10 से 08:55 तक
सुबह 10:55 से दोपहर 12:15 तक
दोपहर 03:40 से शाम 06:35 तक
रात 08:12 से 12:10 तक

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akshay tritiya on 18 april, do goddess lakhsmi worship by this method.
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