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डाउनलोड करेंइंदौर. 82 साल की उम्र में सुदामा नगर की मनोरमाबाई घोलप ने खुद ही अपना देहदान करने का संकल्प लिया। करीब 10 दिन पहले अपने देहदान का फाॅर्म भरा और मुस्कान ग्रुप में जमा किया। रविवार को मंगल सदन में उन्होंने खुद का उत्तर कार्य किया और अपने हाथों से लोगों को खाना भी परोसा। उन्होंने कुटुंब के सभी व्यक्तियों से मिलने की आखिरी इच्छा जाहिर की थी जो रविवार को पूरी हो गई।
अपनी ही आंखों के सामने करवाया पिंड दान, खुद परोसा भोजन
- मनोरमा बाई ने अपने भतीजे हेमू घोलप के हाथों खुद की आंखों के सामने ही पिंड दान, दसवां, तेहरवां और पितृ भोज का कार्यक्रम करवाया।
- उन्होंने बताया कि उनके इस निर्णय को परिवार के लोगों ने भी सराहा है। उन्होंने कहा अपना उत्तर कार्य करवाने के बाद वे सामान्य जीवन व्यतीत करेंगी। वे किसी के मृत्यु भोज में शामिल नहीं होंगी।
- साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मृत्यु उपरांत सभी को इसकी सूचना दें और उनके शरीर को दान कर दें। उनके इस संकल्प से कार्यक्रम में मौजूद कुछ अन्य लोगों ने भी इस प्रकार का देहदान और खुद का उत्तर कार्य करने की इच्छा जाहिर की है।
नौकरी के दौरान ही लिया था ये फैसला
मनोरमा बाई ने 36 साल तक रतलाम जिले में नर्स की नौकरी की। इस दौरान उनके बच्चों की भी शिक्षा पूरी करवाई। उम्र के उस पड़ाव में ही उन्होंने सोच लिया था कि ये शरीर किसी के काम आए तो ही अच्छा है। अगर उनके शरीर का कोई भी अंग से किसी को नया जीवन दे सके तो, उसका जीवन रोशन हो सकेगा।
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