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डाउनलोड करेंअमरेली, लिलिया। अमरेली जिला वैसे तो पिछड़ा माना जाता है। परंतु इस इलाके के कई लोग सूरत, अहमदाबाद, मुम्बई जैसे शहरों में स्थायी रूप से बस गए हैं। ऐसे लोग वहां रहकर भी अपने गांव की माटी के कर्ज को चुकाना नहीं भूलते। तभी तो 30 साल बाद जब माणेक भाई लाठिया अपने परिवार के साथ अपने गांव भींगराड पहुंचे, तो गांव की स्थिति को देखकर उनकी बेटी ने कहा-इस गांव के लोग गरीब हैं, तो पिता ने तुरंत 10 करोड़ रुपए गांव के विकास के लिए दे दिए। मैंने गांव की माटी का कर्ज अदा किया है…
लाठी का भींगराड गांव ऐसे तो पिछड़ा माना जाता है, यहां सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है।यहां अधिकांश लोग गरीब हैं। परंतु इसी गांव से निकलकर सूरत में स्थायी रूप से रहने वाले माणेकभाई लाठिया अब माणेक एक्सपोर्ट के मालिक हैं। 50 साल हो गए उन्हें सूरत में स्थायी रूप से रहते हुए। 30 साल से वे अपने गांव नहीं आ पाए। इस बार जब वे अपने परिवार के साथ गांव आए, तो गांव की हालत देखकर उनकी बेटी ने कहा-इस गांव के लोग गरीब हैं, कुछ तो करो, तो माणेक भाई ने गांव के विकास के लिए 10 करोड़ रुपए का दान दे दिया। जब उनसे पूछा गया कि आपने ऐसा क्यों किया, तो उनका जवाब था कि मैंने अपने गांव की माटी का कर्ज ही अदा किया है।
काम की शुरुआत दलित इलाके से
इसके बाद माणेक भाई ने गांव के विकास का संकल्प ले लिया। इस समय यहां हास्पिटल, स्कूल बिल्डिंग, सार्वजनिक शौचालय, एम्बुलेंस, आरसीसी रोड, जल संग्रह से लेकर सोलर लाइट और प्रवेश द्वारा जैसे कामों की शुरुआत की गई है। सबसे पहले दलित इलाके को ठीक करने का बीड़ा उठाया। इसलिए सबसे पहले बनने वाले भवन में पहला अम्बेडकर भवन ही था। जल संग्रह के लिए 40 बीघा में फैेले तालाब को 22 फीट गहरा किया गया। फिर 240 सोलर लाइट लगाई गई। इस तरह से अब इस गांव को चहुंओर विकास हो रहा है।
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