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डाउनलोड करेंकरनाल। भाई अकेले ही घर की दीवार पर निशाने लगाता रहता था, न कोई कोच था, न ही गलती निकालने वाला। बड़ी बहन ने भाई का हौसला बढ़ाने का निर्णय लिया और खुद भी निशानेबाज बन गई। धीरे-धीरे दोनों ही एक दूसरे की गलतियां निकालने लगे, दोनों एक दूसरे के कोच बन गए। नेट का सहारा लेते, नामी गिरामी खिलाड़ियों के मोबाइल नंबर ट्रेस कर तकनीकी जानकारी भी लेने लगे। खिलौना वाली पिस्तौल से सीखी निशानेबाजी...
- पहचान का दायरा धीरे-धीरे बढ़ गया और राज्य से लेकर राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में शिरकत करने लगे।
- पहले हार, फिर कांस्य पदक और सिल्वर से गोल्ड मेडल जीतने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
- दोनों ने मिलकर अब तक करीब 62 राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय स्तर के मेडल जीत लिए हैं। इनमें बहन के 18 व भाई के करीब 44 पदक शामिल हैं।
- हाल ही में केरल में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाई ने कुल 15 पदक हासिल किए हैं। इनमें 10 गोल्ड और 3 सिल्वर व दो कांस्य पदक शामिल है।
- आस्ट्रेलिया में नवंबर 2017 को कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। जहां वह 577 अंक लेकर टॉपर रहा। वह अब 25 मीटर रेफिड फायर का नेशनल चैंपियन बन गया है।
- दो दिन पहले ही गोल्ड कोस्ट का टिकट मिला है और अब वह अप्रैल-2018 में गोल्ड कोस्ट आस्ट्रेलिया में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए खेलने जाएगा।
- पांच देशाें में अंतर राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तिगत व टीम मेडल जीते हैं। अब घर की कोई ऐसी खूंटी नहीं बची, जिस पर मेडल न हो।
- अभी भी घर की दीवार पर रोजाना चार से पांच घंटे होल्डिंग होती है, इसी से निशाने लगाने में लगातार निपुण होते जा रहे हैं।
- फिलहाल वे आस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में जाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं, ताकि वहां देश की तरफ से खेल सकें।
2012 में स्वीमिंग से हुई शुरुआत
- करनाल के कर्ण विहार निवासी एडवोकेट जगपाल के दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले अनीश व 11वीं कक्षा की छात्रा मुस्कान 10 से 25 मीटर के दायरे में निशाना लगाते हैं।
- शूटिंग में अब धीरे-धीरे निशाना अचूक होने लगा है। वर्ष 2012 में अनीश स्विमिंग करता था। गोवा में मार्डन पेंटाथलान स्पर्धा के लिए अच्छे स्वीमर, रनर, शूटिंग व फेंसिंग करने वाले की जरूरत थी।
- यह वे रोजाना दो घंटे करते थे। वे गोवा गए और अंडर-12 में गोल्ड मेडल जीत लाए।
ये किस्से भी हुए बच्चों के साथ
- जब अनीश 10 वर्ष का था तो परिवार के साथ पूना में आर्मी कैंप में गए थे। जहां परिवार के सदस्यों ने पिस्टल से निशाना लगाया।
- जब अनीश की बारी आई तो आर्मी के जवान ने कहा तू बच्चा है, रहने दे तेरे से नहीं होगा। फिर मेले से पिस्टल जिद कर लाया और घर पर ही दीवारों में निशाने लगाने लगा।
फौजी ने कहा था- बंदूक चलाना खेल नहीं
- 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल के फाइनल्स 30 के स्कोर के साथ अनीस ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका रिकॉर्ड भी है।
- अनीश 16 अप्रैल से 10वीं के पेपर भी देगा। अनीस खेलों के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है और पिछली कक्षाओं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक लेकर पास हुआ है।
- अनीश ने 15 साल की उम्र में ही ऑस्ट्रेलिया में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में वर्ल्ड रिकॉर्ड 30 अंक के साथ गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
- जो पहले ऑस्ट्रेलिया के डेविड चैपमिन के नाम था उन्होंने 2011 में होने वाले ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स में 23 अंक हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था।
- जो अब अनीश ने 30 अंक के साथ 25 मीटर फायर पिस्टल में वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
ऐसे आया टर्निंग पॉइंट
- 10 साल की उम्र में अनीश अपने परिवार के साथ पूना आर्मी कैंप में घूमने गया था। अनीश के निशाना लगाने की बारी आई तो एक फौजी ने कहा कि बंदूक चलाना बच्चों का खेल नहीं है।
- वही बात अनीस को चुभ गई। कैंप से बाहर आते ही जिद कर पूना की मार्केट से खिलौना पिस्तौल खरीदी। इसके बाद घर में दीवारों पर निशान लगाने लगा।
- 2012 में अनीश ने करनाल से पैंटाथालान स्पर्धा के लिए स्वीमिंग, फेसिंग , रनिंग और शूटिंग की अभ्यास शुरू की। लेकिन 2013 में अनीश साइप्रस में अंडर-12 वर्ल्ड कप चैंपियनशिप खेलने के लिए गया।
- यहां उसे कोई पदक नहीं मिल पाया। जिसके बाद अनीश ने 2015 में बीजिंग के जूनियर एशिया चैपिंयनशिप में खेलने के लिए गया तो वहां शूटिंग में अच्छे परिणाम आने लगे।
- जिसके बाद अनीश ने शूटिंग की अभ्यास करना शुरू कर दी।
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