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डाउनलोड करेंनेशनल डेस्क। एंटी टेररिज्म डे पर एक अच्छी खबर। कश्मीर में बॉर्डर पर बीएसएफ ने पाकिस्तान पर ऐसा कहर बरपाया कि पाकिस्तान 'फायरिंग बंद करो, फायरिंग बंद करो' चिल्लाने लगा। 1991 में 21 मई को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हत्या कर दी गई थी। तभी से 21 मई के दिन एंटी टेररिज़्म डे के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर हम आपको बताते हैं कैसे कश्मीर में हमारी सेना ने आर या पार की रणनीति अपना ली है। कश्मीर में 'ऑपरेशन ऑल आउट'...
- कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट चलाया जा रहा है। मकसद है पाकिस्तानी और स्थानीय आतंकियों का पूरा सफाया। टारगेट हैं लश्कर-ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और अल बद्र जैसे संगठन। साउथ एशिया टेररिज्म रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल जवानों ने ज्यादा आतंकियों को ढेर किया है। 2017 के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि मई महीने तक कश्मीर में सेना ने 60 आतंकियों को मार गिराया था, लेकिन इस साल ये आंकड़ा बढ़कर 72 तक पहुंच गया है। आतंकी दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, सोपोर, त्राल इलाके में ज्यादा एक्टिव हैं। इसके चलते सेना ने इन इलाकों में 2000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है।
2017 में सबसे ज्यादा माहौल खराब हुआ
8 जुलाई 2016 को घाटी में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में हिज्बुल आतंकी बुरहान मारा गया था। उसकी मौत के बाद वहां हिंसा भड़क उठी थी। महीनों तक घाटी का माहौल खराब रहा। जिसका सबसे ज्यादा असर 2017 में दिखा। पांच साल के आंकड़े देखें तो 2017 में सबसे ज्यादा 218 आतंकी मारे गए। वहीं 57 स्थानीय नागरिकों की भी मौत हुई।
2017 में सर्च ऑपरेशन 'कासो' चलाया
सेना ने 15 साल बाद फिर से कासो (CASO) ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में सेना 'घेरा डालो और तलाशी लो' के मोड में काम करती है। सोपोर से लेकर श्रीनगर के लालचौक पर सेना ये ऑपरेशन चला चुकी है।
अब आतंकियों की खैर नहीं
सरकार के साथ ही सेना ने भी साफ कर दिया है कि आतंकवादियों के साथ कोई रियायत नहीं की जाएगी। अभी हाल ही में कश्मीर की सभी पार्टियों ने बैठक कर सरकार से अपील की कि रमजान के महीने में आतंकवादियों पर एक्शन न लिया जाए। सरकार ने घाटी में ऑपरेशन नहीं चलाने का फैसला किया लेकिन ये भी साफ कर दिया कि आतंकवादियों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। हमने रमजान में शांति की पहल की लेकिन पाकिस्तान को शांति रास नहीं आई। उसने गोलीबारी शुरू कर दी...जवाब में बीएसपी ने इतने रॉकेट दागे कि बॉर्डर पार से फोन आ गया....प्लीज बंद करो..इससे पहले सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत कह चुके हैं कि जो आतंकियों का साथ देगा वो भी आतंकवादी है। सेना प्रमुख की ये चेतावनी इसलिए जरूरी थी क्योंकि IB रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर के नौजवानों को पत्थर पकड़ाने के लिए पाकिस्तान से पैसे आ रहे हैं। बिचौलिया बने हुए हैं सैयद शाह गिलानी जैसे अलगाववादी नेता। IB के मुताबिक गिलानी समेत अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान से 800 करोड़ मिले हैं। अलगाववादी नेता बाकायदा कश्मीरी युवाओं को पैसे देकर पत्थरबाजी करवा रहे हैं । इसी पैसे का नतीजा है कि 2015 से लेकर 2017 तक घाटी में 4799 पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। ये जानकारी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहिर ने खुद संसद में दी है
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